'सुख के दिन आए तो चले गए मां-बाबा', मां रूपी सोरेन के दशकर्म पर मुंडन के बाद हेमंत की छलछलाई आंखें
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेमरा में अपनी मां स्वर्गीय रूपी सोरेन का दशकर्म संथाली रीति-रिवाजों से किया। मुंडन के बाद ...और पढ़ें

हेमंत सोरेन मां रूपी सोरेन के दशकर्म पर हुए भावुक, नेमरा में बेटों के साथ मुख्यमंत्री।
HighLights
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां स्वर्गीय रूपी सोरेन का दशकर्म।
मुंडन के बाद हेमंत सोरेन की आंखें हुईं छलछलाई।
नेमरा में संस्कार भोज, बाबा रामदेव भी आयेंगे।
अश्विनी रघुवंशी, नेमरा (रामगढ़)। रामगढ़ जिला के नेमरा गांव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता स्वर्गीय रूपी सोरेन का दश कर्म हुआ। संथाली रीति रिवाज से उन्होंने स्वजन के साथ दिन भर कई पारम्परिक और धार्मिक अनुष्ठान किया। दोनों बेटों के साथ हेमंत सोरेन ने मुंडन कराया तो उनकी आंखें छलछला गई। परिवार के लोग सामने थे।
अनायास बोल पड़े कि मां और बाबा ने जीवन भर संघर्ष किया। जूझते रहे। सुख के दिन आए तो मां बाबा चले गए। रहते तो और सेवा करते। खैर, रविवार को नेमरा में संस्कार भोज होगा। जब तक लोग आते रहेंगे, तब तक प्रसाद खिलाने की व्यवस्था की गई है। इसमें बाबा रामदेव भी आयेंगे। उनका दिशोम गुरू स्वर्गीय शिबू सोरेन से मित्रवत रिश्ता रहा है।
रामगढ़ जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर गोला प्रखंड का नेमरा गांव। चारों तरफ पहाड़ी और बीच में आबाद दिशोम गुरू स्वर्गीय शिबू सोरेन का गांव। महासप्तमी को नेमरा में भी हजारों लोग आए। वहां दुर्गा पूजा नहीं अपितु दिशोम गुरु की धर्मपत्नी रूपी सोरेन का दशकर्म का कार्यक्रम चलता रहा। लोग आते रहे।

दोनों बेटों के अलावा परिवार के और लोगों ने भी मुंडन कराया
रूपी सोरेन की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित करते रहे। संथाली समाज की परंपरा में दश कर्म के लिए शुद्धि होती है। चूल्हा पर गए। इसके बाद मुंडन हुआ। सीएम, उनके दोनों बेटों के अलावा परिवार के और लोगों ने भी मुंडन कराया। नदी स्नान हुआ।
कल्पना सोरेन ने भी श्रद्धा के साथ कई विधि विधान किया। तालाब में कुछ चीजें प्रवाहित की गईं। रिश्तेदारों, नजदीकी लोगों के अलावा नेमरा समेत आसपास के गांवों के लोग वस्त्र लेकर आते रहे। कल्पना सोरेन भी कई मौके पर भावुक दिखीं।

सुबह 10 बजे से दश कर्म शुरू हुआ
संथाली समाज में दश कर्म पर वस्त्र देने की परंपरा है। इसका निर्वहन हुआ। सुबह 10 बजे से दश कर्म शुरू हुआ तो रात साढ़े सात बजे तक चलता रहा। हेमंत सोरेन का बराबर ध्यान रहा कि जो लोग आए हैं, वे कुछ खाकर जाय। उन्हें असुविधा नहीं हो।
इधर मुख्यमंत्री से मिलने, उन्हें अपना दुखड़ा सुनाने और निवारण की आस में सैकड़ों लोग आए थे। हेमंत सोरेन को भी इसका अहसास था। रात आठ बजे वे दश कर्म के बाद वे आम लोगों से मिले। हर किसी के अपने दुख, सबकी अपनी अपनी समस्याएं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सबकी समस्याओं का त्वरित समाधान होना चाहिए। इसके बाद वे भोज स्थल गए। वहां की व्यवस्था देखी। सबको निर्देश दिया कि किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए।

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