JHarkhand के विकास के लिए बालिकाओं को मिले पर्याप्त अवसर, बालिका सुरक्षा पर सेमिनार में चीफ जस्टिस ने रखी बात
झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने राज्य में बालिकाओं के प्रति संवेदनशील होने और उनके वास्तविक देखभाल पर जोर दिया है। कहा झारखंड का वास्तविक विकास तभी संभव है जब हम बच्चों खासकर बालिकाओं की पर्याप्त देखभाल और अवसर प्रदान करें। ऐसा होने पर वह जीवन में सफलता हासिल करेंगी। किसी भी राज्य का विकास इन पर ही निर्भर है।

राज्य ब्यूरो,रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने राज्य में बालिकाओं के प्रति संवेदनशील होने और उनके वास्तविक देखभाल पर जोर दिया है।
कहा, झारखंड का वास्तविक विकास तभी संभव है जब हम बच्चों खासकर बालिकाओं की पर्याप्त देखभाल और अवसर प्रदान करें। ऐसा होने पर वह जीवन में सफलता हासिल करेंगी।
किसी भी राज्य का विकास इन पर ही निर्भर है। चीफ जस्टिस शनिवार को ज्यूडिशियल एकेडमी में बालिका सुरक्षा- भारत में बालिका के लिए सुरक्षित और समर्थ वातावरण विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
सेमिनार का आयोजन जुवेनाइल जस्टिस सह पोक्सो कमेटी, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग और यूनिसेफ ने किया था।
राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने झारखंड में मानव तस्करी, पोक्सो मामलों की वृद्धि और 15 वर्ष से कम आयु में बाल विवाह के मामलों पर चिंता व्यक्त की।
मानव तस्करी, पोक्सो पर नियंत्रण को ले हो रहा प्रयास
उन्होंने कहा कि सरकार, नागरिक, समाजिक संगठनों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
यूनिसेफ झारखंड की क्षेत्रीय प्रमुख डा कनीनिका मित्रा ने लिंग आधारित भेदभाव और शिक्षा एवं स्वास्थ्य में असमानता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य तथा मनोवैज्ञानिक समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने सभी हितधारकों से समाज में समावेशी माहौल बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।
तकनीकी सत्रों में जस्टिस राजेश शंकर और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने सभी हितधारकों के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बालकों और बालिकाओं के लिए एक सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
बाल विवाह पर समुदाय आधारित जागरूकता की आवश्यकता
जस्टिस संजय प्रसाद ने बाल विवाह के मुद्दे पर समुदाय आधारित जागरूकता दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के दौरान झारखंड के विभिन्न जिलों से आए युवाओं ने बाल विवाह, बाल शोषण और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों पर आधारित पैनल चर्चा की। इन युवाओं को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में महिला बाल विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार, अन्य विभाग के अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सीडब्ल्यूसी के सदस्य मौजूद थे।
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