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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 17, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

किसान की आत्महत्या सरकार की विफलता

By Babita KashyapEdited By:
Published: Sat, 17 Jun 2017 10:28 AM (IST)

सड़क योजनाओं के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करनेवाली सरकार को किसानों के हित की परवाह नहीं है।

किसान की आत्महत्या सरकार की विफलता
किसान की आत्महत्या सरकार की विफलता

जागरण संवाददाता, पिठोरिया (रांची) पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा बालदेव महतो की आत्महत्या सरकार की विफलता का परिणाम है। रघुवर सरकार सत्ता चलाने में पूरी तरह नाकाम हैं। अलग-अलग सड़क योजनाओं के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करनेवाली सरकार को किसानों के हित की परवाह नहीं है। पिठोरिया सहित कई इलाके सूखाग्रस्त हैं। लेकिन सरकार सिंचाई व्यवस्था के लिए कोई कारगर कदम उठाना जरूरी नहीं समझती।

लगातार फसल खराब होने से वे कर्ज नहीं लौटा पा रहे हैं। किसान कर्ज के बोझ से दबे हैं और आत्महत्या करने को विवश हो रहे हैं। हेमंत सोरेन ने पिठोरिया के सुतियांबे गांव में मृतक किसान बालदेव के परिवार से भी मिले। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत को दबाने की कोशिश अधिकारियों द्वारा सरकार के पक्ष में कारवाई करना और लोकतंत्र का गला घोंटना जैसा है। दो किसानों की मौत, अन्य किसानों के हक की लड़ाई, कर्ज माफी सहित अन्य मुद्दों को लेकर शनिवार को बंद की घोषणा की गई है।

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