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    हाथियों की 300 साल बाद घर वापसी! झारखंड में अपने लिया बना लिया नया रास्ता

    झारखंड में हाथियों ने उन जगहों पर कॉरिडोर बनाना शुरू कर दिया है जहां 300 साल पहले इनका निवास था। दुमका में मसानजोर के किनारे जंगलों से निकलकर गिरिडीह-हजारीबाग-रामगढ़-खूंटी के रास्ते ये हाथी दलमा तक विचरण कर रहे हैं। रांची पटना मुख्य मार्ग पर नेशनल हाइवे पर भी इनकी गतिविधि देखने को मिलती है। यसे अक्‍सर ट्रैफिक रोककर रास्‍ता पार कर लेते हैं।

    By Jagran News Edited By: Arijita Sen Updated: Thu, 15 Feb 2024 01:15 PM (IST)
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    हाथियों ने तैयार किया नया कारिडोर, 300 साल बाद कर रहे हैं घर वापसी।

    दिव्यांशु, रांची। मध्य भारत में हाथियों ने अपने पुराने अधिवास में वापसी प्रारंभ कर दी है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड में भी हाथियों के समूह ने नए काॅरिडोर का निर्माण कर लिया है। इन इलाकों में 300 साल पहले हाथियों का निवास था। दुमका में मसानजोर के किनारे जंगलों से निकलकर गिरिडीह-हजारीबाग-रामगढ़-खूंटी के रास्ते ये हाथी दलमा तक विचरण कर रहे हैं।

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    झारखंड में 17 एलिफेंट कॉरिडोर की पहचान

    रांची पटना मुख्य मार्ग पर नेशनल हाइवे पर बनाए गए डिवाइडर इन्हें अवरोध जरूर लगते हैं, लेकिन कई बार ट्रैफिक तक रोककर ये हाथी इस रास्ते से लगातार आना-जाना कर रहे हैं।

    वन्य प्राणियों के विशेषज्ञ इसे राज्य के जंगलों के लिए और जीवों के लिए शुभ संकेत मानते हैं। भारत सरकार ने झारखंड में अब तक 17 हाथी गलियारे (एलिफेंट कारिडोर) की पहचान की है। इस नए रूट पर हाथियों की ट्रेकिंग की जा रही है। जल्द ही इसे 18वां एलिफेंट काॅरिडोर के तौर पर मान्यता दी जा सकती है।

    सदियों पहले हाथियों से गुलजार था यह क्षेत्र

    संताल परगना में दुमका से लेकर साहिबगंज तक के क्षेत्र में तीन सौ से पांच सौ साल पहले बड़ी संख्या में हाथी पाए जाते थे। मौर्य काल में युद्ध के लिए बिहार के मुंगेर और मौजूदा संताल परगना क्षेत्र से हाथी लाए जाते थे।

    किन्हीं कारणों से यहां परिस्थितियां बिगड़ीं और हाथियों ने यहां से विदाई ले ली। लेकिन बाघ,शेर और हाथी ऐसे जीव हैं जिनमें अपने अधिवास के लिए एक सहज वृति ( इंस्टींट) होती है। रजा काजमी कहते हैं कि इसी वजह से पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ की वापसी हो रही है।

    ट्रैफिक रोककर रास्‍ता बना लेते हाथी

    दुमका से हजारीबाग के बीच पड़ने वाले जंगलों में खनन से लेकर अन्य गतिविधियां कम हैं। इस इलाके में व्यस्ततम ट्रैफिक भी नहीं है। वन्य प्राणियों के विशेषज्ञ रजा काजमी ने बताया कि ऐसे परिवेश में हाथी को विचरण करने में आसानी होती है।

    उनके लिए यह सुखद है कि मानवीय गतिविधियां भी इस क्षेत्र में कम हैं और इन्हें खाने के लिए प्रचूर मात्रा में जंगली उत्पाद मिल रहे हैं। हजारीबाग के पास नेशनल हाइवे को पार करना इनके लिए चुनैतीपूर्ण है। लेकिन, हाथियों की सामूहिक बुद्धिमता इतनी तीक्ष्ण है कि वे एलिफेंट चेन बनाकर ट्रैफिक रोक दे रहे हैं और अवरोध को पार कर लेते हैं।

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