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    Jharkhand News: माध्यमिक आचार्य पद की नियुक्ति में कंप्यूटर साइंस के आवेदकों के साथ भेदभाव,अदालत ने JSSC से मांगा जवाब

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 06:31 PM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक आचार्य (कंप्यूटर साइंस) नियुक्ति के विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जेएसएससी से जवाब मांगा है। प्रियंका कुमारी एवं अन्य ने याचिका दाखिल की है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि विज्ञापन में बीएड या इंटीग्रेटेड बीएड या एमएड को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया गया है जो उचित नहीं है।

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    माध्यमिक आचार्य नियुक्ति के मामले में कोर्ट ने जेएसएससी से जवाब मांगा है।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक आचार्य (कंप्यूटर साइंस) नियुक्ति के विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जेएसएससी से जवाब मांगा है।

    अदालत ने आयोग से पूछा है कि नियुक्ति के लिए सामान्य बीएड की डिग्री चाहिए या कंप्यूटर साइंस में बीएड की डिग्री। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    इस संबंध में प्रियंका कुमारी एवं अन्य ने याचिका दाखिल की है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि विज्ञापन में बीएड या इंटीग्रेटेड बीएड या एमएड को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया गया है, जो उचित नहीं है।

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    बीएड पाठ्यक्रम में कंप्यूटर साइंस शामिल नहीं 

    बीएड पाठ्यक्रम में कंप्यूटर साइंस या किसी अन्य तकनीकी विषय को शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण कंप्यूटर साइंस में स्नातक या स्नातकोत्तर करने वाले छात्रों को बीएड या एमएड करने का अवसर नहीं मिलता।

    इसके चलते कई अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत और भेदभावपूर्ण है।विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता तकनीकी विषयों के लिए उपयुक्त नहीं है, जिससे योग्य अभ्यर्थी वंचित हो रहे हैं। यह उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है।

    उन्होंने कंप्यूटर साइंस विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। लेकिन केवल बीएड की शैक्षणिक बाध्यता के कारण आवेदन से वंचित की जा रही है।

    आयोग उम्मीदवारों से यह अपेक्षा कर रहा है कि उनकी बीएड डिग्री उसी विषय में हो, जिसमें उन्होंने आवेदन किया है। विशेष रूप से कंप्यूटर साइंस विषय में यह शर्त लागू की जा रही है, जबकि कंप्यूटर साइंस से बीएड की डिग्री का कोई प्रविधान ही नहीं है।