झारखंड के 44 प्रखंडों में बीडीओ नहीं, विकास योजनाओं पर पड़ रहा असर
Development Work Jharkhand News BDO Vacant Post इस संबंध में राज्य के ग्रामीण विकास सचिव ने कार्मिक को पत्र लिखा है। पलामू और पश्चिमी सिंहभूम के नौ-नौ प्रखंडों में बीडीओ नहीं हैं। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में असर पड़ रहा है।

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की जवाबदेही ग्रामीण विकास विभाग की है और प्रखंड स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं को प्रभावी बनाने का दायित्व प्रखंड विकास पदाधिकारी पर है। ऐसे में बताने की जरूरत नहीं कि किसी प्रखंड में बीडीओ के नहीं रहने से विकास कार्य कितने प्रभावित हो सकते हैं। झारखंड के 44 प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी हैं ही नहीं।
इसका सीधा असर विकास योजनाओं पर पड़ रहा है। पलामू और पश्चिम सिंहभूम जिले के नौ-नौ प्रखंडों में बीडीओ नहीं हैं, जबकि गढ़वा के सात और पूर्वी सिंहभूम के पांच प्रखंडों में इन पदाधिकारियों का अभाव है। 24 में से 14 जिले इन पदाधिकारियों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण विकास सचिव ने कार्मिक, प्रशासनिक तथा राजभाषा विभाग को इस संदर्भ में पत्र लिखकर 44 पदाधिकारियों की सेवा ग्रामीण विकास विभाग को कराने का अनुरोध किया है।
स्पष्ट कहा है कि इन प्रखंडों में पदाधिकारियों के न होने से मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, एनआरएलएम, पेंशन आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में मुश्किल पेश आ रही है। योजनाओं के क्रियान्वयन में असर पड़ रहा है। सभी प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी के पदस्थापन से विकासात्मक एवं कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बल मिलेगा।
इन प्रखंडों में बीडीओ नहीं
साहिबगंज : मंडरो, साहिबगंज सदर। गोड्डा : बसंतराय। गिरिडीह : गावां। चतरा : कुंदा, इटखोरी। बोकारो : चंद्रपुरा। हजारीबाग : बरही। पलामू : पाटन, लेस्लीगंज, हैदरनगर, पांकी, पड़वा, पांडू, नावाबाजार, रामगढ़, उटारीरोड। गढ़वा : भवनाथपुर, खरौंदी, मझिआव, बरडीहा, विशुनपुरा, सगमा, डंडा। लातेहार : सरयू। सिमडेगा केरसाई, बांसजोर। गुमला : डुमरी, परमवीर अल्बर्ट एक्का जारी। लोहरदगा : पेशरार। पू. सिंहभूम : पोटका, पटमदा, बोड़ाम, धालभूमगढ़, गुड़ाबांधा। पश्चिम सिंहभूम : चक्रधरपुर, नोवामुंडी, बंदगांव, खूंटपानी, मंझगाव, टोंटो, कुमारडुग्गी, आनंदपुर और गुदड़ी।
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