रांची : कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अरुण उरांव ने पत्थलगड़ी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि सरकार ने विकास का नारा देकर वोट तो लिया लेकिन उसे पूरा करने में नाकाम रही। जिसका नतीजा है कि गांव वाले पत्थलगड़ी कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी करना असंवैधानिक नहीं है क्योंकि पत्थलगड़ी आदिवासियों की संस्कृति में शामिल है। 1996 में पेसा कानून आने के बाद लोग अपने गांव की सीमा पर पत्थलगड़ी करके कानून के तहत गांव को मिली शक्ति के बारे में लिखते थे। खूंटी में होने वाले पत्थलगड़ी पर उन्होंने कहा कि यह भगवान बिरसा की भूमि है। लोग यहां पर पहले से ही आंदोलन करते आए हैं। जब उन्हें ऐसा लग रहा है कि इस राज में उनकी जमीन सुरक्षित नहीं और मूलभूत सुविधाएं भी सरकार उपलब्ध नहीं करा पा रही है तो वो पत्थलगड़ी करके विरोध दर्ज करा रहे हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार के पास तंत्र है और वह इसके पीछे के कारणों को पता लगाने में सक्षम है। लेकिन सरकार की ओर से ऐसी पहल ही नहीं की जा रही है। सरकार इसके लिए पहल करती है तो कांग्रेस उसका साथ देगी। लेकिन इसके लिए सबसे पहले सरकार को आगे आना होगा।

अफीम की खेती के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है और वो पता लगाए कि गांव वालों को अफीम की खेती के लिए पैसे कौन दे रहा है। कहा कि सरकार का यह कहना गलत है कि गांव में जाना प्रतिबंधित है, तो ऐसे में नक्सल के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान पुलिस बल के कहीं भी जाने को क्या कहेंगे। खूंटी में बंधक बनाने के मामले में उन्होंने कहा कि वहां के ग्रामीणों को जब जिला प्रशासन ने मूलभूत समस्याओं को दूर करने का वादा किया तब जाकर उन लोगों के द्वारा जवानों को छोड़ा जाना सरकार की विफलता को दर्शाता है। इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, शमशेर आलम सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप