Jharkhand Weather: 19 जुलाई से छाएंगे बादल, अगले पांच दिन कुछ ऐसा रहेगा मौसम का मिजाज; पढ़ें अपडेट
Jharkhand Weather Update झारखंड में लगातार मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में रूक-रूककर बारिश हो रही है जिससे किसानों को राहत मिली है। वहीं शहरी इलाकों की बात की जाए तो वहां के लोगों की मुश्किलें बढ़ी है। हालांकि मौसम विभाग की माने तो अगले पांच दिन तक प्रदेश में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।

जागरण संवाददाता, रांची। Jharkhand Weather Update राजधानी रांची समेत पूरे राज्य के मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। पिछले एक सप्ताह से रूक रूककर हो रही वर्षा ने जहां किसानों को राहत दी है।
वहीं, शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए आफत बन गई। यह सिलसिला अब अगले पांच दिनों तक थम जाएगा फिर 19 जुलाई से राजधानी के आसमान में बादल छाएंगे और वर्षा होने की संभावना जताई जा रही है।
रविवार (14 जुलाई) को बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विज्ञान केंद्र रांची से जारी पूर्वानुमान की बात करें तो 14 जुलाई को राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना है।
दरअसल, यह बदलाव बंगाल की खाड़ी में रूक-रूककर बन रहे क्लाउड सर्कुलेशन के कारण हो रहा है। बताया गया कि जून में एक बार जबकि जुलाई में अब तक एक बार ही क्लाउड सर्कुलेशन का असर देखने को मिला है जबकि प्रतिमाह औसतन यह सर्कुलेशन तीन से चार बार बनने के बाद ही अच्छी वर्षा हाेने की बात कही जाती है।
औसत वर्षा का आकलन करना होगा जल्दबाजी- मौसम विज्ञानी
वहीं, मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद की माने तो 19-20 जुलाई के बाद से सर्कुलेशन का असर देखने को मिलेगा। यह सिलसिला अगस्त और सितंबर माह में भी देखने को मिलेगा। इसलिए, औसत वर्षा का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।
पिछले वर्ष भी जून और जुलाई माह में औसतन 27 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई थी, लेकिन इसकी क्षतिपूर्ति अगस्त और सितंबर माह में हो गई थी। एक जून से 13 जुलाई तक हुई वर्षा के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि पूरे राज्य में औसतन 316.7 मिमी वर्षापात की जगह 161.9 मिमी वर्षापात हुआ है।
राजधानी में 327.6 मिमी की जगह 168.4 मिमी वर्षा
राजधानी रांची में 327.6 मिमी की जगह 168.4 मिमी वर्षापात हुआ है, जो कि औसत से काफी कम है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस वर्षापात से किसानी को बल तो नहीं मिलेगा लेकिन बीजारोपण और मिट्टी को नम बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
मृदा विज्ञानी डा. डीके शाही की माने तो इस वर्षापात से मिट्टी की नमी तो बनी रहेगी लेकिन आगामी दिनों यदि पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो इसका असर किसानी पर पड़ेगा। बताया कि रांची जिला के अलावे अन्य जिलों के लिए भी बुलेटिन जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्षापात नहीं होने से इसका असर आगामी दिनों खरीफ फसल पर भी पड़ने की संभावना है।
सिमटती हरियाली ने बिगाड़ा खेल
राजधानी समेत पूरे राज्य में हो रहे निर्माण कार्य और खनन कार्यों ने जहां हरियाली को कम कर दिया है। वहीं, इसका सीधा असर राज्य के मौसम पर भी पड़ रहा है। बादल संघनन की प्रक्रिया धीमी हो गई है और जून माह में कम वर्षापात रिकॉर्ड किया जा रहा है और यह जुलाई में शिफ्ट हो रहा है।
अक्सर ऐसी स्थिति तब देखने को मिलती है जब एक ही शहर में कहीं वर्षापात तो कहीं खिली धूप नजर आती है। शनिवार को भी रांची के धुर्वा से लेकर डाेरंडा क्षेत्र में झमाझम वर्षा हुई जबकि कांटाटोली, लालपुर और कोकर क्षेत्र में वर्षा नहीं हुई।
अबकी बार उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में होगी अच्छी वर्षा
मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद बताते हैं कि क्लाउड सर्कुलेशन में हो रहे बदलाव का ही परिणाम है कि इस बार उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में अच्छी वर्षा हुई है और कयास भी लगाए जा रहे हैं कि आगामी दिनों अच्छी वर्षा होगी। वहीं, उत्तर पश्चिमी और कोल्हान क्षेत्र में कम वर्षापात हुए, जबकि पिछले वर्ष इसके विपरित स्थिति बनी थी।
24 घंटे का ऐसा रहा मौसम
पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो राज्य के सभी स्थानों पर हल्की व मध्यम दर्जे की वर्षा हुई, जबकि कहीं-कहीं भारी वर्षापात हुआ। राज्य में मानसून की गतिविधि सामान्य नजर आई। सबसे अधिक वर्षा 73 मिमी लातेहार के नेतरहाट में रिकॉर्ड की गई।
सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सरायकेला का, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस रांची का रिकॉर्ड किया गया। राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
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