रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने अधिवक्ता राजीव कुमार रिश्वतकांड की जांच सीबीआइ को सौंप दी है। अदालत ने कहा कि सीबीआइ 15 दिनों में मामले की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। अदालत ने कहा है कि सीबीआइ इस बात का पता लगाए कि आखिर कोलकाता के व्यवसायी अमित अग्रवाल ने झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में उनके न्यायिक पदाधिकारी, जांच एजेंसियों और राज्य के वरीय अधिकारियों के साथ संबंध होने की बात में कितनी सच्चाई है। अमित अग्रवाल ने इसी आधार पर वकील को रिश्वत देने की पेशकश की थी। इसके बाद अदालत ने अमित अग्रवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनकी ओर से ईडी द्वारा गिरफ्तारी क चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अमित अग्रवाल को भेज दिया था हाईकोर्ट

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी अमित अग्रवाल की याचिका को खारिज कर दिया था। कहा था कि अपनी बात झारखंड हाई कोर्ट में ही रखें। सुनवाई के दौरान अमित अग्रवाल के अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने कहा कि इस मामले में स्वयं पीड़ित है। उन्होंने एक केस मैनेज करने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। लेकिन ईडी ने उन्हें भी आरोपित बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया है, जो उचित नहीं है। इस पर ईडी के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि इन्होंने एक जनहित याचिका को मैनेज करने के नाम पर रिश्वत देने की पेशकश की है। ऐसे में इन्हें राहत नहीं दी जानी चाहिए। इसके बाद अदालत ने अमित अग्रवाल की क्वैसिंग (निरस्त) याचिका को खारिज कर दिया।

पूर्व विधायक निर्मला देवी के खिलाफ निर्वाचन याचिका खारिज

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम चौधरी की अदालत ने बड़कागांव के तत्कालीन विधायक निर्मला देवी के खिलाफ दाखिल निर्वाचन याचिका को खारिज कर दिया है। वर्ष 2014 में हुए बड़कागढ़ से विधायक बनी निर्मला देवी के निर्वाचन को आजसू के उम्मीदवार रोशन लाल चौधरी ने चुनौती दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी की ओर से लगाए गए एक भी आरोप का साक्ष्य नहीं दिया गया है। डबल वोटिंग सहित मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों को भी साबित नहीं किया जा सका है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है। रोशन लाल चौधरी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था मतगणना में गड़बड़ी की गई थी। कई बूथों पर जितने वोट डाले गए थे, उससे अधिक की मतगणना हुई थी। बहुत कम वोट से वे हारे थे। परिणाम आने के बाद ही उन्होंने सक्षम पदाधिकारी से शिकायत की थी। उनकी शिकायतों पर गौर नहीं किया गया।

Edited By: M Ekhlaque

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