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    Jharkhand Crime: वन भूमि घोटाला में सीआइडी की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपित किंग पिन गिरफ्तार

    Updated: Sat, 12 Jul 2025 06:55 PM (IST)

    बोकारो के तेतुलिया मौजा में वन भूमि की करीब 107 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले की जांच कर रहा अपराध अनुसंधान विभाग रांची की टीम ने दो मुख्य आरोपित व इस घोटाले के किंग पिन इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। उनपर उक्त जमीन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी खरीद-बिक्री करने के आरोपों की पुष्टि हुई है।

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    वन भूमि की करीब 107 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले की गई गिरफ्तारी।

    राज्य ब्यूरो, रांची। Jharkhand Crime बोकारो के तेतुलिया मौजा में वन भूमि की करीब 107 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले की जांच कर रहा अपराध अनुसंधान विभाग रांची की टीम ने दो मुख्य आरोपित व इस घोटाले के किंग पिन इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया।

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    दोनों ही गिरफ्तार आरोपितों को रांची स्थित न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से दोनों ही आरोपित 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं। दोनों ही आरोपिताें पर उक्त जमीन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी खरीद-बिक्री करने के आरोपों की पुष्टि हुई है।

    इसी केस में Suprime Court ने राज्य सरकार को जमीन का मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। सीआइडी ने डीजीपी के आदेश पर बोकारो के सेक्टर 12 थाना में 18 मार्च 2024 को दर्ज प्राथमिकी को टेकओवर करते हुए केस दर्ज किया और अनुसंधान शुरू किया था।

    इस केस के शिकायतकर्ता वन प्रमंडल बोकारो के प्रभारी वनपाल सह वनरक्षी रूद्र प्रताप सिंह थे। उन्होंने इस केस में नौ नामजद को आरोपित बनाया था।

    आरोपितों में बोकारो के सेक्टर-12 के उकरीद गांव निवासी इजहार हुसैन, उसके भाई अख्तर हुसैन, सेक्टर चार के सिटी सेंटर निवासी शैलेश कुमार सिंह, चास के अभिमन्यू नगर निवासी रंगनाथ सिंह, बोकारो स्टील प्लांट कालोनी निवासी जेएन सिंह सचिंद्र प्रसाद पांडेय, सत्येंद्र सत्यार्थी, माधव प्रसाद सिन्हा व आरबी सिंह शामिल थे।

    क्या है दोनों पर आरोप

    वर्ष 2012 में आरोपित इजहार हुसैन, अख्तर हुसैन ने एक आपराधिक साजिश रचकर उक्त विवादित जमीन का फर्जी कागजात बनाया। आरोपितों ने दावा किया कि चास थाना के तेतुलिया मौजा के प्लांट नंबर 426 के 40.60 एकड़, प्लाट नंबर 450 का 86.60 एकड़ भूमि उसके दादा को 23 अक्टूबर 1933 में 1551 रुपये में प्राप्त है।

    यह जानकारी पुरुलिया के DC कोर्ट में 1993 में आक्शन प्राेसिडिंग के तहत दी। इसके बाद कथित सेल सर्टिफिकेट की सर्टिफायड कापी डिप्टी रजिस्ट्रार पुरुलिया के कार्यालय से 26 अप्रैल 2005 को सत्यापित दिखाया।

    उसके आधार पर आरोपित ने सीओ चास को म्यूटेशन के लिए आवेदन दिया। वर्ष 2012-2013 में हल्का कर्मचारी रंगनाथ सिंह की जांच रिपोर्ट पर 29 जून 2012 को उक्त जमीन का म्यूटेशन हुआ था। मामला उजागर होने के बाद डीसी बोकारो ने वर्ष 2016 में म्यूटेशन रद कर दिया था।

    उच्च न्यायालय ने तकनीकी आधार पर डीसी बोकारो के आदेश को रद कर दिया, लेकिन टाइटल सूट दायर करने की छूट दी थी। इसी बीच वर्ष 2021 में इजहार व अख्तर ने उमायुस मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड को केवल 10.3 करोड़ में बेच दिया।

    तब उक्त जमीन का सर्किल दर 23 करोड़ रुपये था। अब दोनों प्लाट के वन भूमि मामले में वन विभाग ने केस दायर कर रखा है। इसी मामले में वर्तमान में सीआइडी जांच चल रही है।

    ईडी भी मनी लांड्रिंग के तहत कर रही जांच

    बोकारो के तेतुलिया मौजा की वन भूमि घोटाला मामले में ईडी भी मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही है। ईडी ने अपनी जांच के क्रम में ही 22 अप्रैल को इस जमीन से जुड़े आरोपितों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी।

    इस छापेमारी में बिहार के बांका निवासी श्री राम कंस्ट्रक्शन के संचालक बीर अग्रवाल के घर से 1.30 करोड़ रुपये नकदी मिले थे। बीर अग्रवाल के बेटे पुनित अग्रवाल के रांची स्थित राजबीर कंस्ट्रक्शन के ठिकाने पर भी ईडी ने छापा मारा था। ईडी ने जांच में पाया था कि उक्त विवादित जमीन की खरीद-बिक्री में पुनित अग्रवाल ने भी निवेश किया है।

    ईडी ने राजबीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक पुनित अग्रवाल के अलावा शैलेश सिंह, शैलेश सिंह के बेटे आयुष कुमार सिंह, चास के पूर्व अंचल अधिकारी सह धनबाद के डीटीओ दिवाकर द्विवेदी, बोकारो के पूर्व व धनबाद के वर्तमान सब रजिस्ट्रार रामेश्वर प्रसाद सिंह, चास के पूर्व सीओ निर्मल टोप्पो, जमीन विक्रेता इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन के ठिकानों को भी तलाशा था।