Jharkhand Politics: बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार को निशाने पर लिया, पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर पुलिस की मनमानी का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे एक आदिवासी कार्यकर्ता को प्रताड़ित किया गया जबकि डाहू यादव जैसे अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। मरांडी ने आरोप लगाया कि डाहू यादव को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है और पुलिस उसे पकड़ने में विफल है।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में बढ़ती पुलिस की मनमानी को लेकर हेमंत सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा कि ये हेमंत सरकार की तानाशाही है या झारखंड पुलिस की मनमानी कि अपने समाज के लिये हक की लड़ाई लड़ने एवं सैकड़ों गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा का भार संभालने वाले एक संताल आदिवासी को गलत तरीके से हिरासत में लेकर प्रताड़ित कर मार दिया जाता है, जबकि एक कुख्यात अपराधी, जिसे सुप्रीम कोर्ट, ईडी और सीबीआई सब मिलकर अपराधी घोषित कर चुके हैं, उसे गिरफ्तार करने से झारखंड पुलिस कतरा रही है?
उन्होंने ने अपने पोस्ट में सवाल करते हुए लिखा कि मैं सवाल पूछना चाहता हूं, राजेश उर्फ़ डाहू यादव के बारे में जो झारखंड में बालू और पत्थर के अवैध खनन व काले कारोबार का बड़ा हिस्सा चलाता है। झारखंड पुलिस को बताना चाहिए कि कहाँ है वो?
जुलाई 2022 में ईडी ने उसके ठिकानों पर छापा मारा, करोड़ों की संपत्तियाँ ज़ब्त कीं, बैंक अकाउंट फ़्रीज़ किए और उसका एक जहाज़ भी ज़ब्त किया। कुर्की ज़ब्ती तक हुई। लेकिन कार्रवाई के बाद क्या हुआ? डाहू यादव सिर्फ़ एक बार ईडी दफ़्तर पहुँचा और उसके बाद से आज तक फ़रार है।
पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा कि पुलिस-प्रशासन की नाक के नीचे अवैध कारोबार चलता रहा। गंगा में नाव पलटने से पांच निर्दोष मजदूरों की मौत हो गई, लेकिन सरकार और पुलिस ने कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2022 में आदेश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर सरेंडर करे। लेकिन आदेश की भी कोई परवाह नहीं की गई।
ये हेमंत सरकार की तानाशाही है या झारखंड पुलिस की मनमानी कि अपने समाज के लिये हक की लड़ाई लड़ने एवं सैकड़ो गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा का भार सँभालने वाले एक संताल आदिवासी को ग़लत तरीक़े से हिरासत में लेकर प्रताड़ित कर मार दिया जाता है, जबकि एक कुख्यात अपराधी, जिसे सुप्रीम…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 28, 2025
उन्होंने आगे लिखा है कि जब “ऊपर” से आदेश आता है तो झारखंड पुलिस दिन-रात एक कर छापेमारी करती है, हिरासत में ले लेती है, यहाँ तक कि फर्जी एनकाउंटर तक कर देती है। लेकिन डाहू जैसे फरार अपराधियों को छूने से भी डरती है, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि तीन साल से अधिक समय से झारखंड में अपराध का एक बड़ा चेहरा खुलेआम फरार है और पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही या शायद पकड़ना चाहती ही नहीं और कभी पकड़ेगी भी नहीं। जबकि उस इलाके का बच्चा-बच्चा जानता है कि डाहू सत्ताधारी और पुलिस के संरक्षण में आज भी साहिबगंज इलाके में सारे गोरखधंधे को डंके के चोट पर अंजाम दे रहा है। और काली कमाई की हिस्सेदारी नीचे से ऊपर तक पहुंचा रहा है।
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