Surya Hansda Encounter: पुलिस ने थर्ड डिग्री और इलेक्ट्रिक शॉक से की हत्या, बाबूलाल मरांडी का बड़ा आरोप
बाबूलाल मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत की सीबीआई जांच की मांग की। पुलिस पर थर्ड डिग्री टार्चर और इलेक्ट्रिक शॉक देकर हत्या कर मुठभेड़ का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। NCST ने भी मामले की जांच शुरू की। हांसदा के परिवार ने राजनीतिक हत्या का दावा किया जबकि पुलिस मुठभेड़ का बचाव कर रही है।

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। मरांडी का दावा है कि हांसदा की हत्या पुलिस ने थर्ड डिग्री की यातना और इलेक्ट्रिक शॉक दे कर की और फिर इसे मुठभेड़ के रूप में पेश करने के लिए उनके शव को फेंक दिया गया।
मरांडी ने यह सनसनीखेज बयान एक वीडियो के माध्यम से इंटरनेट मीडिया में जारी किया है। जिसमें वे कथित एनकाउंटर पर मीडिया को संबोधित कर रहे हैं।
वीडियो में वे कहते हैं, "पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर और बिजली के झटके देकर सूर्या हांसदा की हत्या की और लाश फेंक कर इसे एनकाउंटर बताने का षड्यंत्र रचा है। पुलिस सादी वर्दी में आती है, पूछताछ के लिए ले कर जाती है। ललमटिया थाना में यातना दें कर मार दिया जाता है। बॉडी परिवार वालों को भी पोस्टमार्टम के बाद दिया गया। इससे पहले शव के पास मीडिया को भी जानें नहीं दिया गया।" इसको एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया गया है। पक्ष-विपक्ष की इस पर तमाम प्रतिक्रियाएं आ रही है।
भाजपा बता रही सुनियोजित हत्या
सूर्या हांसदा के एनकाउंटर को बीजेपी लगतार इश्यू बनाए हुए है। हांसदा पहले बीजेपी से जुड़े थे और चुनाव भी लड़ चुके हैं। आखिरी चुनाव उन्होंने जयराम महतो की पाटी झारखंड क्रांतिकारी मोर्चा से लड़ा था। पुलिस का दावा है कि हांसदा को गिरफ्तार करने के दौरान उनकी सहायता करने आए उनके साथियों ने पुलिस पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। हालांकि हांसदा के परिवार और समर्थकों ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित हत्या करार दिया है।
मरांडी ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई वरिष्ठ नेताओं को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, "यह झारखंड के लिए कितनी दुखद बात है कि हांसदा को मुठभेड़ में नहीं मारा गया, बल्कि उनकी हत्या की गई।"
NCST ने भी लिया है संज्ञान
इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी संज्ञान लिया है। NCST की एक टीम ने गोड्डा जाकर हांसदा के परिवार से मुलाकात की और घटनास्थल का दौरा किया। NCST के सदस्य अशा लाकड़ा ने पुलिस के दावों पर संदेह जताते हुए कहा, "पुलिस का दावा है कि हांसदा के खिलाफ 25 मामले दर्ज थे, लेकिन स्थानीय लोग उन्हें एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानते हैं। हमने पुलिस कर्मियों के नाम और उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों की कॉपी मांगी है।"
हांसदा पर हत्या, हत्या का प्रयास, फिरौती के लिए अपहरण, वसूली, आपराधिक साजिश, अवैध हथियारों का कब्जा और दंगा जैसे कई मामले दर्ज थे। उनके परिवार का दावा है कि उन्हें अधिकांश मामलों में बरी कर दिया गया था। राजनीतिक कारणों से सारे मुकदमे हुए हैं।
मामले की जांच कर रही है सीआईडी
झारखंड पुलिस ने अभी तक मरांडी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अभी पूरे मामले की जांच सीआईडी कर रही है। राज्य सरकार की ओर से भी इस मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। भाजपा के तमाम नेता इस इश्यू को जोर शोर से उठा रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया व कानूनी विशेषज्ञों की राय
सोशल मीडिया पर #JusticeForSuryaHansda ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए और सीबीआई जांच की मांग की। हांसदा के गांव में शोक का माहौल है, जहां लोग उन्हें एक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद कर रहे हैं।
हांसदा गरीब आदिवासी बच्चों के लिए चांद भैरव राजा राज विद्यालय भी चलवाते थे, जिसकी चर्चा की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त सबूत होने चाहिए। यदि थर्ड डिग्री की यातना और इलेक्ट्रिक शॉक के सबूत मिलते हैं, तो यह एक आपराधिक मामला बन सकता है।
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