सीता सोरेन के इस्तीफे की खबर मिलते ही शिबू सोरेन का ऐसा हो गया हाल, बहू को फोन लगाकर कह दी ये बात
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष शिबू सोरेन की बड़ी बहू व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायक भाभी सीता सोरेन मंगलवार को झामुमो छोड़ भाजपा में शामिल हो गईं। यह झामुमो के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। पहली बार सोरेन परिवार में भाजपा ने सेंधमारी है। बहू के इस्तीफे की खबर मिलते ही ससुर शिबू सोरेन ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की।

जागरण संवाददाता, रांची। Sita Soren Resigns: सीता सोरेन का अचानक झामुमो (JMM) का साथ छोड़ भाजपा (BJP) में शामिल होना पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन (Shibu Soren) के लिए किसी झटके से कम नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक, अपनी बड़ी बहू के इस्तीफे की खबर मिलते ही ससुर शिबू सोरेन सक्रिय हो गए।
ससुर ने की बहू को मनाने की कोशिश
उन्होंने सीता का मनाने की भी बहुत कोशिश कर, लेकिन आखिर तक बात नहीं बनी। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक इस्तीफे की सूचना जब दी गई तो शिबू सोरेन ने कहा कि बात करेंगे।
फिर सूचना आई कि वह भाजपा ज्वाइन कर रही हैं। सीता सोरेन (Sita Soren) ने बात करने का समय तक नहीं दिया। भट्टाचार्य के मुताबिक इसे मतलब साफ है कि यह पहले से योजनाबद्ध था।
सोरेन परिवार ने भाजपा ने की सेंधमारी
यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह पहली दफा है जब भाजपा ने शिबू सोरेन के परिवार में सेंधमारी की है।सीता के भाजपा में शामिल होने से संताल परगना की राजनीति पर प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, हेमंत की गिरफ्तारी को लेकर अगर आदिवासी सुरक्षित सीटों पर वोटरों के बीच सहानुभूति का कोई फैक्टर प्रभावी होगा तो सीता सोरेन वहां भाजपा के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती हैं।
सीता ने शिबू सोरेन को दिए अपने इस्तीफे में लिखा है कि पति दुर्गा उरांव के निधन के बाद से वह उपेक्षा की शिकार हैं। उन्हें पार्टी और परिवार से सदस्यों से अलग-थलग किया गया, जो उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है।
सीता की नाराजगी स्वाभाविक है: बाबूलाल
इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सीता सोरेन अपनी पार्टी और परिवार के सदस्यों से वर्षों से प्रताड़ित हो रही थीं। अपमान सहने की भी एक सीमा होती है। सीता सोरेन शिबू सोरेन की बड़ी बहू और स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं।
दुर्गा सोरेन ने छाया की तरह झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन का साथ देकर संघर्ष किया। यदि दुर्गा सोरेन जीवित होते तो झामुमो में मुख्यमंत्री के उम्मीदवार होते। सीता सोरेन की पीड़ा यही है कि दुर्गा सोरेन के संघर्ष को भुला दिया गया और जिन्होंने कोई संघर्ष नही किया वे शीर्ष पर पहुंच रहे। सीता सोरेन की नाराजगी स्वाभाविक है।
सरकार के रवैए में कोई सुधार की गुंजाइश नहीं देखते हुए उन्होंने अपने लिए अलग राह चुनी। सीता सोरेन के भाजपा में आने से पार्टी और मजबूत होगी। उधर,भाजपा के प्रदेश प्रवक्त प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झामुमो चाटुकारों से घिरी है। सीता सोरेन जी को झामुमो में काफी अपमानित किया गया। सीता सोरेन के सवालों पर पार्टी को जवाब देना चाहिए।
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