रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार को मुखिया के सम्मेलन में 4,398 पंचायत प्रतिनिधियों को विकास का पाठ भी पढ़ाया। पढ़ने-लिखने की नसीहत भी दी तो उनके अधिकार पर किसी तरह की रुकावटें नहीं आने देने का भरोसा भी दिलाया। कहा कि मुखिया रोड, नाली की ही नहीं पूरे गांव की चिंता करें।

मुख्यमंत्री ने राज्य भर के मुखिया से आपस में विकास कार्यो की प्रतिस्पद्र्धा करने की भी नसीहत दी। विभागीय पदाधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि छह माह पर बेहतर कार्य करनेवाले मुखिया को सम्मानित करें।

उन्होंने पंचायत स्वयं सेवकों तथा ग्रामीण पंचायत सचिवालयों के गठन पर उठ रहे सवाल पर स्पष्ट रूप से कहा कि ये स्वयंसेवक मुखिया को सहयोग करने के लिए नियुक्त किए गए हैं।

वे मुखिया के समानांतर कार्य नहीं कर उनके निर्देश पर ही कार्य करेंगे।

बता दें कि राज्य भर के मुखिया अपने अधिकारों का हनन बताते हुए पूर्व में इसका विरोध कर रहे थे। सीएम ने उनसे टकराव छोड़कर आपसी समन्वय से गांवों के विकास का आह्वान किया ताकि राज्य पर 19 पिछड़े जिलों का कलंक दूर हो सके।

कहा, मुखिया एक कदम स्वयं चलें, तीन कदम सरकार चलेगी। इससे पहले, विकास आयुक्त डीके तिवारी ने मुखिया को शुरू हो रही पानी, बिजली और सड़क की तीनों योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि पहली बार इसकी जिम्मेदारी मुखिया को मिल रही है।

उन्होंने बताया कि सोलर पैनल से पानी टंकी के माध्यम से घरों में पानी पहुंचाने पर 3 लाख 16 हजार रुपये की लागत आएगी। स्ट्रीट लाइट में 35 वाट की लाइट लगाई जाएगी जो आठ साल तक चलेगी।

इस पर प्रत्येक गांव पर पौने तीन लाख रुपये खर्च होंगे। पंचायती राज सचिव प्रवीण टोप्पो ने गांवों के विकास में मुखिया की भूमिका पर प्रकाश डाला।

जांच-परख के बाद ही होगी कार्रवाई : नीलकंठ

ग्रामीण विकास सह पंचायती राज मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि सरकार ऐसी नियमावली गठित कर रही जिसके तहत अब किसी मुखिया पर कार्रवाई जांच-परख के बाद ही हो सकेगी।

शुरू में जानकारी के अभाव में हुई गलतियों पर कार्रवाई हुई। अटल ग्रामोत्थान योजना के तहत प्रत्येक पंचायत के एक सबसे पिछड़े गांव की पहचान कर उसका विकास किया जाएगा।

अप्रैल से किसानों के खाते में जाने लगेगी राशि

कार्यक्रम में कृषि पशुपालन सचिव पूजा सिंघल ने कहा कि अप्रैल माह से केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान तथा राज्य की मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना की राशि किसानों के बैंक खाते में जानी शुरू हो जाएगी।

इसके लिए ग्राम सभा में लाभुकों की सूची प्रकाशित कर आपत्तियां मंगाई गई हैं। संशोधित सूची जारी कर फिर से आपत्तियां मंगाकर अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।

बता दें कि पहली योजना में अधिकतम पांच एकड़ जमीन रखनेवाले किसानों को प्रत्येक साल छह हजार रुपये तीन किस्तों में मिलेंगे।

दूसरी योजना में पांच हजार रुपये प्रति वर्ष ऐसे किसानों को मिलेंगे। उनके अनुसार, सरकारी सेवकों, एमएलए, एमपी, आयकर दाताओं आदि को इन दोनों योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।

मुखिया ने शेयर किए अपने अनुभव, रखीं मांगें

- गाइडलाइन के अभाव में छोटी-मोटी गलतियों के लिए कई मुखिया पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। सरकार इसे वापस ले। ग्राम पंचायतों को कर लगाने का भी अधिकार हो ताकि उस राशि से गांव का विकास हो सके। केरल में यह लागू है।

अजय कुमार सिंह, पेटरवार, बोकारो। - सरकार के सहयोग से पूरे गांव को ओडीएफ बनाया। ग्राम पंचायतों को समय पर राशि मिले ताकि विकास के कार्य समय पर हो सकें। हम गांवों के विकास में सरकार को हर प्रकार की मदद करेंगे।

देवंती देवी, जमीरा, रामगढ़ - राज्य वित्त आयोग का गठन हो। मनरेगा में प्रशासनिक स्वीकृति का अधिकार मिले। मुखिया को मानदेय महज एक हजार रुपये मिलते हैं जो काफी कम है। दूसरी तरफ, चुनाव के बाद हमारा रोजगार भी बंद हो जाता है। सभी जिलों में नियम में एकरूपता हो।

विकास महतो, डुमडुकिया, धनबाद।

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