रांची : जिला और प्रखंड स्तरीय बीस सूत्री समितियों में बड़े पैमाने पर भाजपा के नेताओं-कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिलेगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार को इसकी मंजूरी दे दी है। अरसे से इसकी प्रतीक्षा की जा रही थी। होली के ठीक पहले इसे हरी झंडी देकर मुख्यमंत्री ने भाजपा के नेताओं को रंग के त्योहार का तोहफा दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक इन समितियों में 3000 से ज्यादा भाजपा के कार्यकर्ताओं को जगह मिली है। इसके अलावा भाजपा ने अपनी सहयोगी पार्टी आजसू का भी ख्याल रखा है। आजसू के 300 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ताओं को बीस सूत्री समितियों में पद मिलेगा। होली के बाद इस बाबत आधिकारिक अधिसूचना राज्य सरकार जारी करेगी।

क्या होगा पद का फार्मूला

जिला स्तरीय बीस सूत्री समिति में भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्षों को उपाध्यक्ष का पद दिया जाएगा। इसी प्रकार मंडल अध्यक्ष प्रखंड स्तरीय बीस सूत्री कमेटी के अध्यक्ष होंगे। वैसे लोगों को समिति में जगह नहीं मिलेगी जिन्होंने चुनाव लड़ा है। इस दायरे में पलामू के मनोज कुमार सिंह आएंगे। चुनाव लड़ने के कारण वे पद से वंचित रहेंगे।

नए सिरे से बनेगी शांति समिति

थाना स्तर पर गठित शांति समितियों में भी बड़े पैमाने पर भाजपा के कार्यकर्ताओं की हिस्सेदारी होगी। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे शांति समितियों का पुनर्गठन करें। उल्लेखनीय है कि समितियों का पुनर्गठन झारखंड गठित करने के बाद नहीं हुआ है।

अभी और भी है जगह

सत्तापक्ष के नेताओं-कार्यकर्ताओं को शासन में सीधे हिस्सेदारी का और मौका मिलेगा। जल्द ही राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा समितियों का गठन होगा। इसमें भारी संख्या में भाजपा-आजसू से जुड़े नेताओं-कार्यकर्ताओं की हिस्सेदारी होगी।

कुछ जिलाध्यक्ष रह गए वंचित

बीस सूत्री कमेटियों में शामिल होने से भाजपा के कई जिलाध्यक्ष वंचित रहेंगे। इसमें चतरा, बोकारो, गुमला, गढ़वा आदि जिलों के भाजपा अध्यक्ष शामिल हैं। इनके नाम की प्रदेश नेतृत्व की अनुशंसा नहीं की है।

सीएम आवास में हुई होली

होली के मौके पर कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान मंत्रियों, विधायकों समेत भारी संख्या में भाजपा के नेता-कार्यकर्ता मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने सभी को होली की बधाई दी। समारोह के बाद मुख्यमंत्री जमशेदपुर चले गए।

बीस सूत्री समितियों का उद्देश्य

बीस सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 1975 में की गयी थी। इसके बाद 1982, 1986 तथा 2006 में इस कार्यक्रम की फिर से रचना की गई। वर्तमान में बीस सूत्रीय कार्यक्रम 2006 लागू है। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य पिछड़े एवं निर्धन व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसके तहत गरीबी उन्मूलन, जीवन स्तर में सुधार, शिक्षा, किसान मित्र, श्रमिक कल्याण, खाद्य सुरक्षा, सबके लिए आवास, शुद्ध पेयजल, जन स्वास्थ्य, सबके लिए शिक्षा, अनुसूचित जाति-जनजाति अल्पसंख्यक एवं अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण, महिला कल्याण, बाल कल्याण, युवा विकास, बस्ती सुधार, पर्यावरण संरक्षण एवं वन वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण सड़क, ग्रामीण ऊर्जा, पिछड़ा क्षेत्र विकास, ई-शासन आदि बिंदु सम्मिलित हैं। भारत सरकार साख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को उक्त कार्यो की मासिक रिपोर्ट भेजी जाती है।