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    Kartik Amavasya 2019: छिन्नमस्तिका मंदिर में होती हैं हर मनोकामनाएं पूरी, साधना-सिद्धि के लिए जुटते हैं श्रद्धालू; जानिए

    By Sujeet Kumar SumanEdited By:
    Updated: Fri, 18 Oct 2019 02:30 PM (IST)

    दामोदर नदी और भैरवी नदी के त्रिकोण में स्थापित माता छिन्नमस्तिका का मंदिर देश में एकलौता मंदिर है। पुजारियों की मानें तो छिन्नमस्तिके का मंदिर स्वयं भगवान विश्वकर्मा नेे बनाया है।

    Kartik Amavasya 2019: छिन्नमस्तिका मंदिर में होती हैं हर मनोकामनाएं पूरी, साधना-सिद्धि के लिए जुटते हैं श्रद्धालू; जानिए

    रामगढ़, जेएनएन। कार्तिक अमावस्या की काली रात तंत्र-मंत्र की सिद्धि और साधना के लिए अहम माना जाता है। इस महीने 27 तारीख को काली पूजा मनाई जाएगी। इसके लिए सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर में तैयारी शुरू हो गई है। सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिके मंदिर तंत्र-मंत्र की साधना और सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।

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    तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए यह भूमि प्रभावशाली मानी जाती है। इसीलिए तो कई बड़े तांत्रिक व साधक यहां उस रात को पहुंचते हैं। इस रात कई साधक और तांत्रिक खुले आसमान के नीचे तो कई पहुंचे हुए तांत्रिक श्मसान भूमि और घने जंगलों में भी गुप्त रुप से तंत्रमंत्र सिद्धि के लिए साधना करेंगे। छिन्नमस्तिके व दक्षिणेश्वरी काली मंदिर सहित अन्य मंदिरों की चमचमाती रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। कार्तिक अमावस्या के मौके पर पूजा अर्चना के लिए इन मंदिरों का पट रातभर खुला रहेगा और पूजा-अर्चना जारी रहेगी।

    दामोदर व भैरवी नदी के त्रिकोण में स्थापित है धाम

    असम के कामरूप कामख्या से पहुंचे एक तांत्रिक ने बताया कि छिन्नमस्तिका मंदिर में शक्ति का एहसास होता है। दामोदर नदी और भैरवी नदी के त्रिकोण में स्थापित माता छिन्नमस्तिका का मंदिर देश में एकलौता मंदिर है। तांत्रिक के अनुसार, तप के लिए जितनी शक्ति छिन्नमस्तिके की धरती पर मिलती है। शायद उतनी शक्ति कामरूप कामख्या में भी महसूस नहीं करता हूं। तांत्रिक ने बताया कि छिन्नमस्तिके की पावन धरती में साधना और सिद्धि के लिए दिव्य शक्ति मिलती है। यहां सच्चे मन से साधना करने से माता का दिव्य रुप का दर्शन भी आसानी से हो सकता है। त्वरित फल की प्राप्ति भी संभव है।

    स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने बनाया है छिन्नमस्तिके मंदिर

    श्मशान भूमि पर स्थापित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में मां छिन्नमस्तिका की प्रतिमा ग्रेनाइट पर उकेरी गई है।स्थानीय पुजारियों की मानें तो माता छिन्नमस्तिके का मंदिर स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने बनाया है। जबकि यहां दक्षिणेश्वरी काली मंदिर श्मशान भूमि पर स्थापित है। ऐसे में यहां शक्ति की उपासना का काफी महत्व है। इसलिए साधना और तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए देशभर के साधक व तांत्रिक यहां अपनी वांछित मनोकामना पूर्ण करने के लिए सिद्धि करते हैं।

    रहस्यमयी होती है काली पूजा

    यहां कार्तिक अमावस्या की रात कई रहस्यों को काली चादर पर लपेटे हुए महसूस होगी। काली पूजा के मौके पर यहां का दिन जितना सुहाना होता है, रात उतनी ही रहस्यमयी लगती है। दिन में कई अनजान चेहरे कौतूहल पैदा करते हैं। वहीं, रात में घने जंगलों के बीच उठती आग की लपटों और धुएं, जंगलों, पहाड़ों और झर-झर कर बहती नदियों के बीच से आती अनजान आवाजों से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इधर, मंदिर प्रक्षेत्र में रातभर भजन कीर्तन और हवन कुंडों में दहकती आग की लपटें आलौकिक शक्ति का एहसास कराती हैं। कई साधक गुप्त रुप से साधना के लिए जंगलों में लीन रहते हैं। इसका एहसास रात में जंगलों में उठने वाली धुंआ व रहस्यमयी आवाजों से ही महसूस किया जा सकता है।

    छिन्नमस्तिका मंदिर के पुजारी लोकेश पंडा ने बताया कि कार्तिक अमावस्या की साधना व पूजा से सभी विघ्न बाधाएं दूर होने के अलावा न सिर्फ धन संपत्ति की प्राप्ति होती है बल्कि रोग, शोक, शक्ति व शत्रु का दमन भी होता है। वहीं तंत्र मंत्र सिद्धि करने वालों के लिए यह रात शक्ति प्रदान करती है।