बरकाकाना : प्रकृति से प्रेम करने वालों के लिए सिद्धवार खुर्द के पहाड़ों के बीच बसा धुरधुरिया झरना एक अनुपम उपहार है। यहां प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। सूर्य की पहली किरण के साथ ही 50 फीट की ऊंचाई से वेग के साथ गिरते पानी की कल कल धारा बरबस ही लोगों का ध्यान खींचती है। यह नजारा देखने के लिए हर वर्ष सैलानी नए साल व अन्य मौकों पर यहां पहुंचते हैं। पहाड़, झरने व पेड़-पौधों के लुभावने प्राकृतिक नजारे यहां लोगों को सुकून व मस्ती का एकसाथ अहसास कराते हैं। पहाड़ों के बीच चट्टानों से घिरा व पेड़, लत्तर से पटा स्थान जिले के लिए प्रकृति का वरदान है।

उधर दूसरी ओर सिद्धवार खुर्द गांव के पहाड़ों के दूसरे छोर पर बसा हलवादी गांव व सिद्धवार के अंतिम छोर पर अमझरिया झरना भी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां भी बड़े पैमाने पर पिकनिक का मजा लेने लोग पहुंचते हैं।

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यहां जाने के लिए

बरकाकाना : धुरधुरिया झरना तक पहुंचने के लिए रामगढ़-बरकाकाना मुख्य सड़क फायरिंग रेंज व तेलियातू गांव होते हुए वाहनों से जाया जा सकता है। शहर से करीब 20-25 किलोमीटर का रास्ता तय करना होगा। झरना तक पहुंचने के लिए पैदल ही जाया जा सकता है। वैसे कई और रास्तों का प्रयोग किया जा सकता है। यहां रामगढ़ टायरमोड़ से, चायना क्रबिस्तान, तेलियातू, पोचरा, बुजुर्ग जमीरा आदी गांवों के रास्ते भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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क्या है खासियत

बरकाकाना : धुरधुरिया झरना प्रकृति की गोद में बसा है। यहां पहाड़ों से घिरा यह स्थान ठंड में हाड़ कंपा देता है। झरने का पानी अत्यंत मीठा लगता है। पहाड़ों व लत्तरों सहित जंगलों से घिरा है। वेग से गिरने वाला पानी रफ्ता-रफ्ता संतुलित गति से आगे की ओर बढ़ता हुआ आकर्षक दृश्य उत्पन्न करता है। चट्टानें सपाट और चिकनी हैं, जो देखने में संगमरमर की तरह लगती हैं। कोयल की कुहू-कुहू मन में उल्लास पैदा करती है। सूर्य की पहली किरण के साथ पेड़-पौधों के बीच से निकलकर जमीन पर छटा बिखेरने वाली चमक देखते ही बनती है।

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