Updated: Wed, 22 Jan 2025 08:25 AM (IST)
पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में आयोजित आदिवासी हो समाज महासभा के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन में तलाक के मुद्दे पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसमें तय किया गया है कि यदि पति-पत्नी के बीच संबंध विच्छेद होता है तो संतान पर अधिकार पिता का होगा। यह निर्णय आदिवासी हो समाज की पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार लिया गया है।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। Jharkhand News: पिछले दिनों पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड के घोड़ाबांधा में आदिवासी हो समाज महासभा के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन में तलाक पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसमें तय हुआ है कि यदि किसी कारणवश पति-पत्नी में संबंध विच्छेद होता है तो ऐसी स्थिति में संतान पर अधिकार पिता का ही होगा।
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इस संबंध में जानकारी देते हुए आदिवासी हो समाज महासभा की केंद्रीय समिति के संयुक्त सचिव छोटेलाल तामसोय ने बताया कि आदिवासी हो समाज में तलाक की प्रक्रिया नहीं है। फिर भी यदि वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण है।
शांतिपूर्ण और सुखमय नहीं है तो वैसी स्थिति में विवाहित जोड़ी के बीच गंभीर एवं विषम परिस्थिति उत्पन्न होने पर, दोनों इस संबंध को तोड़ना चाहे तो मामा एवं समाज के प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति में विचार विमर्श एवं समझाने के उपरांत भी बात नहीं बनती है तो ऐसी स्थिति में पति-पत्नी के बीच संबंध विच्छेद हो सकता है।
आदिवासी समाज में इसे बागे-बापागे के रूप में देखा गया है। सामाजिक चर्चा में निर्णय लिया गया कि यदि लड़का दोषी पाया जाता है तो अर्जित संपत्ति का हिस्सा जीवन यापन हेतु लड़की को देय होगा जो वास्तविक स्थिति के अनुसार समाज के लोग तय करेंगे परंतु पैतृक संपत्ति पर कोई विचार नहीं होगा।
विवाह विच्छेद के कारण लड़का और लड़की दोनों में से कोई भी हो सकता है लेकिन विवाह विच्छेद के बाद बच्चों की जिम्मेदारी पति के ऊपर होगी। क्योंकि कुर्सी नामा के अनुसार हो समाज पितृ प्रधान समाज है जो बच्चों के भविष्य के लिए अत्यंत जरूरी है।
समिति में इन्हें मिली जगह
वार्षिक अधिवेशन में शादी से संबंधित दस्तूर को लिपिबद्ध करने को बनी समिति वार्षिक अधिवेशन के खुला सत्र में लिए गए निर्णयों को हो समाज के शादी से संबंधित दस्तूर के रूप में लिपिबद्ध करने के लिए एक समिति बनाई जिसमे केंद्रीय अध्यक्ष मुकेश बिरुवा के साथ, बमिया बारी, हरीश समड, रमेश जेराई, रमय पुरती, जदुनाथ तिऊ, छोटेलाल तामसोय, कालीचरण बिरुआ, अंजू समड, इन्दु हेम्ब्रम, गणेश पाट पिंगुआ, इपिल समड और गब्बरसिंह हेम्ब्रम शामिल होंगे।
अगले 6 महीने में दस्तावेज को अंतिम रूप देने का लक्ष्य तय
अगले छह महीने के अंदर में दस्तावेज को अंतिम रूप देने का लक्ष्य तय किया गया है। संयुक्त सचिव ने कहा कि आदिवासी हो समाज महासभा हो समाज के बीच काम करने वाली शीर्ष इकाई है। हो समाज से संबंधित दस्तूरों को बनाए रखने के लिए महासभा कृतसंकल्प है।
इस प्रयास को सर्वप्रथम महासभा दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करके सफल बनाने का प्रयास करेगी, उसके बाद आने वाले समय में जन्मसंस्कार और मृत्यु संस्कार से संबंधित विषयों को भी लिपिबद्ध किया जाएगा। त्योहारों से संबंधित विधियां भी लिपिबद्ध की जाएगी।
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