बॉक्साइट नगरी का सजा है लोहरदगा के सिर पर ताज
लोहरदगा में बॉक्साइड की माइनिंग सबसे उत्तम
राकेश सिन्हा/विक्रम चौहान
जागरण संवाददाता, लोहरदगा : जिले की पहचान बॉक्साइट नगरी के रूप में है। यहां बॉक्साइट की बगडू, पाखर, चांपी आदि स्थानों में खदानें हैं। लोहरदगा में ब्रिटिश काल में ही बॉक्साइट को पहचान मिली थी। उसका प्रमाण है कि रोप-वे के माध्यम से बगडू से आज भी बॉक्साइट का परिवहन किया जाता है। कई दशकों से बॉक्साइट का खनन और परिवहन लोहरदगा में किया जाता रहा है। बॉक्साइट व्यवसाय और परिवहन से गुमला और लातेहार जिले का भी जुड़ाव रहा है। जिले के सिर पर बॉक्साइट नगरी का ताज सजा हुआ है। बॉक्साइट पर ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लोहरदगा की अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। इस व्यवसाय पर 50 हजार लोग अपनी जिदगी के लिए निर्भर हैं। लोहरदगा जिला खनिज से समृद्ध जिला है। यहां बॉक्साइट का पाट गुमला और लातेहार जिला तक फैला हुआ है।
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बॉक्साइट खनिज के लिए यहां पर कुल 16 खनन पट्टे निर्गत किए गए थे। फिलहाल लॉकडाउन के कारण बॉक्साइट के कार्य प्रभावित हैं। जिले में वार्षिक लगभग 11 लाख टन बॉक्साइट खनिज के खनन की स्वीकृति प्राप्त है। जिले के बॉक्साइट मुरी एवं रेनुकुट स्थित संयंत्र को बॉक्साइट की आपूर्ति की जाती रही है। यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बॉक्साइट आधारित व्यवसाय पर निर्भर है। बॉक्साइट के खनन से लेकर परिवहन और उससे जुड़े व्यवसाय के माध्यम से यहां के हजारों परिवार गुजारा कर रहे हैं। 80 के दशक से ही यहां पर बॉक्साइट कारखाने की मांग होती रही है, परंतु इसे पूरा करने की हिम्मत किसी भी राजनीतिक दल ने नहीं दिखाई है। पहले तो थोड़ा बहुत शोर भी सुनाई देता था, अब तो वह भी गुम हो गया है। बॉक्साइट आधारित कारखाने की स्थापना होने से यहां पर रोजगार का स्वरूप बदल सकता है।
लोहरदगा जिले के बगडू और पाखर के अलावा चांपी आदि क्षेत्रों में भी बॉक्साइट की प्रचुरता है। पहाड़ों में तो जैसे एल्यूमीनियम के भंडार छिपे हुए हैं। लोहरदगा में बॉक्साइट के व्यवसाय से ट्रक ऑनर, मजदूर, गैरोज संचालक, मिस्त्री, लोडिग-अनलोड़िग मजदूर जुड़े हुए हैं। इनके लिए रोजगार का यह एक बेहतर माध्यम है।
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