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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jharkhand News: नक्सली इलाके में जहां उड़ती रहती थी बारूद की गंध, अब गांव में फैल रही सब्जियों की महक

By Utkarsh PandeyEdited By: Aysha Sheikh
Published: Tue, 12 Dec 2023 04:55 PM (IST)

Jharkhand News झारखंड के लातेहार में एक इलाका ऐसा था जहां बारुद की गंध आती रहती थी वहां आजकल हरी-हरी ...और पढ़ें

नक्सली इलाके में जहां उड़ती रहती थी बारूद की गंध, अब गांव में फैल रही सब्जियों की महक
नक्सली इलाके में जहां उड़ती रहती थी बारूद की गंध, अब गांव में फैल रही सब्जियों की महक

रूपेश कुमार, लातेहार। लातेहार जिले के नक्सल प्रभावित इलाके के सरयू में एक समय ऐसा था कि बारुद की गंध आती रहती थी, वहां आजकल हरी-हरी सब्जियां लहलहा रही हैं। हिंसा और रोजगार की समस्या के चलते जो आदिवासी पलायन कर जाते थे, वो अब सब्जियां उगाकर मुनाफा कमा रहे हैं।

लातेहार जिले से 18 किलोमिटर दूर सरयू प्रखंड के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के डबरी गांव के मुरपाटोला निवासी कृषक रामलाल उरांव ने दो एकड़ भूमि पर चिंचित कर हरी सब्जियां लहलहा रही हैं। उन्होंने कहा कि गांव में जंगलों के चलते हजारों आदिवासियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा था।

गांव में रहने वाले चेरो, भुईया, अगारिया, खरवार, परहइया, बैगा जैसे आदिवासियों के सैकड़ों परिवार रोजगार न होने से पलायन कर रहे थे, लेकिन अब इनमें से दर्जनों लोग अपने गांव में ही सब्जियां उगाकर जीविका चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय मेंं खेत में आलू, लहसून, पेचकी, गंदा, मटर, चना, टमाटर, सरसो, मिर्चा, बैगन, पालक साग, धनिया व गोबी की सब्जियां लहरा रही हैं।

अपनी पत्नी के साथ की खेती

खेती के बारे में रामलाल उरांव ने बताया कि बालूमाथ में प्रशिक्षण लेकर अपनी पत्नी के साथ खेती कर रहे है। उन्होंने कहा कि एक वर्षों पहले दो एकड़ भूमि को बंजर माना जाता था। मगर कड़ी मेहनत के बाद बंजर जमीन को खेती के अनुकुल बनाया और परिणाम यह निकला कि हर मौसमी फसल व हरी सब्जियों की पैदावार से अब सालाना पचास से साठ हजार रूपये आमदनी हो जा रही है।

कूप से कर रहे हैं सिंचाई

गर्मी के मौसम में खेती के लिए सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो जाती थी। लेकिन इसके समाधान के लिए मनरेगा योजना से एक कुंआ का निर्माण कराया। इससे फसलों की सिंचाई करने में काफी फायदा हुआ। कुंआ बनने के बाद पहले से अधिक भूभाग में खेती करते हैं। उनकी खेती कि एक विशेषता यह है कि मक्का की हो या सब्जियों की खेती रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते हैं।

प्रशिक्षण लेकर मेनहत कर गांव के लोग कृषि से जुड़ कर खेती कर मुनाफा कमा रहे है। मैं गांव जाकर रामलाल उरांव का उत्साहवर्द्धन करूंगा और लोगों को खेती करने को लेकर प्रेरित करूंगा। - अमृृतेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी लातेहार।

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