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घर की चौखट से निकलकर बनीं बिजनेसमैन, कोडरमा की राधा यादव 20 महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:00 AM (IST)

झुमरीतिलैया की राधा यादव 20 महिलाओं के समूह के साथ जूट के विविध उत्पाद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।

महिलाओं को बैग बनाने सिखाती राधा यादव। (जागरण)

महिलाओं को बैग बनाने सिखाती राधा यादव। (जागरण)

HighLights

  1. राधा यादव 20 महिलाओं को जूट उत्पाद बनाना सिखाती हैं।

  2. समूह जूट के झोले, पर्स जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करता है।

  3. यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पर्यावरण बचाती है।

संवाद सहयोगी, कोडरमा। हुनर को अवसर में बदलने का जज्बा हो तो सीमित संसाधनों में भी बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है।

झुमरीतिलैया के इंदरवा की राधा यादव इसकी मिसाल हैं। महिला विकास समिति के बैनर तले वह 20 महिलाओं के समूह के साथ जूट से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।

कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर से रोजगार का अवसर तलाश रही हैं। जूट के झोले, बोतल बैग, फोल्डर फाइल, डायरी कवर, लैपटाप बैग, वाल बैग, महिला पर्स और हैंडबैग जैसे उत्पाद तैयार कर यह समूह महिला सशक्तीकरण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

राधा यादव बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही क्रोशिया से खिलौने बनाने और सुतरी से शैक्षणिक प्रोजेक्ट तैयार करने का शौक था।

विवाह के बाद उन्होंने अपने इस हुनर को केवल शौक तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजगार का माध्यम बनाने की सोची। उन्होंने अपनी योजना महिला समूह की अन्य सदस्यों के साथ साझा की और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

इसके बाद महिला विकास समिति, कोडरमा के करमा साख समूह के माध्यम से चेचाई स्थित आरसेटी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। आगे चलकर वह मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड से जुड़ीं और जूट उत्पाद निर्माण का काम शुरू किया।

90 प्रतिशत अनुदान पर मिली सिलाई मशीनें

इस पहल को आगे बढ़ाने में सरकारी सहयोग भी महत्वपूर्ण साबित हुआ। मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की ओर से 90 प्रतिशत अनुदान पर इलेक्ट्रिक और मैनुअल सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गईं। इन मशीनों की मदद से समूह की महिलाएं जूट के विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं।

Radha Yadav

समूह में फिलहाल 20 महिलाएं काम कर रही हैं। इसके साथ ही राधा युवतियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें हुनरमंद बनाने और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रही हैं।

घरेलू जिम्मेदारियों के साथ सशक्तीकरण

समूह से जुड़ी गीता देवी, सीता देवी, मनीता देवी समेत अन्य महिलाओं के लिए यह पहल बदलाव का माध्यम बनी है। पहले उनकी दिनचर्या मुख्य रूप से घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थी, लेकिन अब वे घर के कामकाज के साथ प्रतिदिन चार से पांच घंटे समूह के लिए निकालती हैं। जूट उत्पाद तैयार करने से उन्हें
आमदनी का अवसर मिला है।

महिला सशक्तीकरण के साथ पर्यावरण संरक्षण

राधा यादव की यह पहल महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। जूट प्राकृतिक रेशा है और इससे बने उत्पाद प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को कम करने में मदद कर सकते हैं।

समूह द्वारा तैयार झोले, फोल्डर और अन्य वस्तुएं दैनिक जीवन में प्लास्टिक के विकल्प के रूप में उपयोगी हैं। वहीं, महिला पर्स और हैंडबैग जैसे उत्पाद रैक्सिन से बनी वस्तुओं के विकल्प के तौर पर भी तैयार किए जा रहे हैं।

उनकी पहल अभी 20 महिलाओं के समूह तक सीमित है, लेकिन इससे जुड़ी युवतियों को प्रशिक्षण देने का प्रयास भविष्य में इसे और विस्तार देने की संभावना पैदा करता है।

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