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कोडरमा में अवैध माइका खनन से उजड़ रहा हाथियों का आशियाना, हाईकोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा असर

Published: Sun, 05 Apr 2026 08:32 AM (IST)

कोडरमा के छतरबर वन्यजीव आश्रयणी में अवैध माइका खनन से जंगल और वन्यजीवों, खासकर हाथियों का अस्तित्व खतरे में है। ...और पढ़ें

मायका माइनिंग। फाइल फोटो

मायका माइनिंग। फाइल फोटो

HighLights

  1. कोडरमा के छतरबर में अवैध माइका खनन जारी

  2. 50 से अधिक खदानें, लगातार विस्फोट, जंगल का विनाश

  3. हाथियों का प्राकृतिक आवास नष्ट, रिहायशी इलाकों में पलायन

अनूप कुमार, कोडरमा। झारखंड के कोडरमा वाइल्ड लाइफ के छतरबर क्षेत्र में इन दिनों अवैध माइका खनन ने जंगल और वन्यजीवों के अस्तित्व पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

आरआईटी (रामगोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी) संस्थान से करीब दो किलोमीटर अंदर से शुरू होकर लगभग आठ किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगल में खनन माफियाओं ने 50 से अधिक छोटे-बड़े अवैध खदान बना दिए हैं।

यह इलाका वन्य प्राणी आश्रयणी के रूप में अधिसूचित है, जहां किसी भी प्रकार की गैरवाणिकी गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके दिन-रात हो रहे खनन और विस्फोटों ने यहां के प्राकृतिक संतुलन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

कभी जंगली हाथियों का स्थायी ठिकाना रहा यह क्षेत्र अब उनके लिए असुरक्षित हो गया है। लगातार हो रहे विस्फोट और जंगलों की कटाई से हाथी अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर कोडरमा और रजौली अनुमंडल क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जहां उत्पात मचा रहे हैं। 26 फरवरी को जयंती माइंस के पास विस्फोटक की चपेट में हाथियों का झुंड आ गया था, जिससे झुंड बिखर गया।

  • भारी विस्फोट से दहल रहा जंगल
  • कोडरमा के छतरबर वन्यजीव आश्रयणी क्षेत्र में माफियाओं ने बना दी 100 से ज्यादा खदानें
  • दिन-रात उड़ाए जा रहे है विस्फोटक
  • वन्यजीवों पर बढ़ा खतरा

इन अवैध खदानों में होता है खनन 

छतरबर से बिहार सीमा दिबौर और झरकी विशनपुर तक जयंती, बुढ़िया, लकरमंदवा, खैरा, तुमरईया, बंडा और ललकी माइंस जैसे बड़े खदानों के अलावा दर्जनों नए अवैध खदान विकसित कर दिए गए हैं। यहां से निकाला गया माइका छतरबर, पुतो, बेकोबार, डुमरीडीहा रोड और मोरियावां के गोदामों तक पहुंचाया जा रहा है।

वन्यप्राणी आश्रयणी क्षेत्र की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोडरमा-रजौली पथ एनएच-20 के एलाइनमेंट को झारखंड उच्च न्यायालय ने वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर बदलने का निर्देश दिया है। बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है।

इन गोदामों में आता है माइका 

अधिकतर माइका कोडरमा के छतरबर इलाके के एक बड़े माइका गोदाम में लाकर एकत्रित किया जाता है। इसके अलावा छतरबर से पुतो होते हुए बेकोबार, डुमरीडीहा रोड और मोरियावां के माइका गोदामों में यह अवैध माल जाता है।

गूगल मैप पर भी देख सकते हैं अवैध खनन की स्थिति

आश्रयणी क्षेत्र में अवैध खनन की स्थिति को गूगल मैप पर भी आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि जंगली क्षेत्र में मैप से लाइव तस्वीर दिखाई नहीं देती, लेकिन जानेवाले कई रास्तों में वाहनों की आवाजाही देखी सकती है।

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