लातेहार डीसी की नीलामी पड़ी भारी: 6 अप्रैल तक भुगतान नहीं हुआ तो हाई कोर्ट में सशरीर हाजिर होंगे खनन पदाधिकारी
झारखंड हाई कोर्ट ने लातेहार जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को नीलाम किए गए वाहन के 28 लाख रुपये के भुगतान ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
DMO को 28 लाख रुपये तुरंत चुकाने या पेश होने का आदेश।
कोर्ट ने भुगतान में गड़बड़ी को जानबूझकर किया गया कृत्य बताया।
क्या है पूरा मामला?
इसके बाद प्रार्थी ने हाई कोर्ट की शरण ली। अदालत ने पहले ही आदेश दिया था कि यदि रजिस्ट्रेशन में बाधा है, तो विभाग वाहन वापस ले ले और प्रार्थी की राशि लौटा दे। भुगतान में देरी होने पर प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल की।
अदालत की कड़ी फटकार: जानबूझकर की गई गड़बड़ी
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि ब्याज की राशि का भुगतान चेक से कर दिया गया है, लेकिन मूल राशि (28 लाख) एनईएफटी के माध्यम से भेजी गई थी। तकनीकी खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका क्योंकि खाते में कंपनी के बजाय प्रोपराइटर का नाम दर्ज था।
अदालत ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ब्याज की राशि कंपनी के नाम पर चेक से दी गई, तो मूल राशि एनईएफटी करते समय नाम क्यों बदला गया?" अदालत ने इसे 'जानबूझकर किया गया आचरण' करार दिया ताकि प्रार्थी को भुगतान न मिल सके। खंडपीठ ने दो टूक कहा कि कोर्ट ऐसे प्रशासनिक व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
प्रशासनिक पेच में फंसा प्रार्थी
प्रार्थी 'जेके मिनरल एंड डेवलपर्स' पिछले काफी समय से अपनी जमा राशि की वापसी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। नीलामी की प्रक्रिया में बैंक लोन और एनओसी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाने या अनदेखा करने के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ। अब गेंद जिला खनन विभाग के पाले में है, जिसे सोमवार तक इस वित्तीय गतिरोध को दूर करना होगा।
