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    पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्य तिथि आज

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 28 Jul 2020 05:00 PM (IST)

    संवाद सूत्र करमाटांड़ (जामताड़ा) पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि नंदनकानन करमाट

    पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्य तिथि आज

    संवाद सूत्र, करमाटांड़ (जामताड़ा): पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि नंदनकानन करमाटांड़ में बुधवार को पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्यतिथि मनाई जाएगी। हालांकि कोरोना महामारी को लेकर इस बार पुण्यतिथि में आयोजन का उल्लास फीका नजर आएगा। क्योंकि प्रत्येक वर्ष बंगाल के कोलकाता व अन्य राज्यों से लोग पंडित विद्यासागर को नमन करने पहुंचते थे। लेकिन इस बार बाहर के लोग अपने-अपने स्थानों से उन्हें नमन करेंगे। स्थानीय समिति के लोग ही पंडित ईश्वर विद्यासागर माल्यार्पण कर उन्हें याद करेंगे। विद्यासागर रक्षा समिति के देवाशीष मिश्रा व चंदन मुखर्जी ने बताया कि कोरोना को लेकर केवल माल्यार्पण का कार्यक्रम किया जाएगा। अन्य सभी कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के पुण्य तिथि के अवसर पर गरीब असहाय लोगों के बीच मास्क वितरण किया जायेगा।

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    एक परिचय : विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को मेदीनीपुर में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह स्वतंत्रता सेनानी भी थे। ईश्वरचंद्र को गरीबों और दलितों का संरक्षक माना जाता था। उन्होंने नारी शिक्षा और विधवा विवाह कानून के लिए आवाज उठाई और अपने कार्यों के लिए समाज सुधारक के तौर पर पहचाने जाने लगे। उन्हें बंगाल में पुनर्जागरण के स्तंभों में से एक माना जाता है। उनके बचपन का नाम ईश्वर चंद्र बंद्योपाध्याय था। संस्कृत भाषा और दर्शन में अगाध ज्ञान होने के कारण विद्यार्थी जीवन में ही संस्कृत कॉलेज ने उन्हें ''विद्यासागर'' की उपाधि प्रदान की थी। इसके बाद से उनका नाम ईश्वर चंद्र विद्यासागर हो गया था। ---बांग्लाभाषा के जनक : ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने स्थानीय भाषा और लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूलों की एक श्रृंखला स्थापित की । उन्होंने इन स्कूलों को चलाने में आने वाले पूरे खर्च की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली थी। स्कूलों के खर्च के लिए वह विशेष रूप से स्कूली बच्चों के लिए बांग्ला भाषा में लिखी गई किताबों की बिक्री से फंड जुटाते थे। वर्ष 1855 ई. में जब उन्हें स्कूल-निरीक्षक बनाया गया तो उन्होंने अपने अधिकार-क्षेत्र में आने वाले जिलों में बालिकाओं के लिए स्कूल सहित अनेक नए स्कूलों की स्थापना की थी। वे विधवा-पुनर्विवाह के प्रबल समर्थक थे। विधवा-पुनर्विवाह एवं स्त्री शिक्षा के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया था। उन्होंने संस्कृत कॉलेज में आधुनिक पश्चिमी विचारों का अध्ययन आरंभ कराया था।

    अभी उपेक्षित है पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर का नंदनकानन : पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर अपने अंतिम 20 वर्ष करमाटांड़ के नंदनकानन में रहकर ही यहां के आदिवासी व असहाय लोगों की मदद की। इसलिए करमाटांड़ आज पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाम से प्रसिद्ध है। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के कर्म भूमि नंदनकानन को देखने कई बार जिला प्रशासन से लेकर मंत्री, विधायक तक पहुंचे परंतु इनकी कर्मभूमि को विशेष दर्जा अब तक नहीं मिला है।

    ---नंदनकानन में चलने वाली बालिका विद्यालय बंद : पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के कर्मभूमि नंदनकानन में बालिकाओं के लिए विद्यालय का संचालन किया जाता था परंतु वह विद्यालय किताब के पन्नों में सिमट कर रह गया है। सरकार से मदद नहीं मिली। समिति के लोग भी सक्षम नहीं हुए चलाने में। कई दिनों तक समिति के लोगों ने मध्याह्न भोजन के साथ विद्यालय का संचालन किया था, परंतु सरकारी सुविधा नहीं मिलने के कारण आगे स्कूल नहीं चल सका। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर का देहावसान 29 जुलाई 1891 में हुआ था।