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    बिदापाथर में भगवान पा‌र्श्वनाथ की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 26 Feb 2020 06:19 AM (IST)

    बिदापाथर (जामताड़ा) मंगलवार को बिदापाथर में नवनिर्मित पा‌र्श्वनाथ जैन मंदिर में भगवान पा‌र्श्वनाथ मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा गाजे-बाजे के साथ की गई। पारसनाथ के कलिकुंड तीर्थ उदारक राजेंद्र सूरिस्वरजी महाराज के शिष्य राज परम सुरीश्वरजी महाराज आदि व साध्वी शीलरच्छिता महाराज व साध्वी दक्ष गुणाश्री महाराज सह दर्जनों साधु साध्वी ने प्रात सात बजे विधिविधान के साथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा की।

    बिदापाथर में भगवान पा‌र्श्वनाथ की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा

    बिदापाथर (जामताड़ा) : मंगलवार को बिदापाथर में नवनिर्मित पा‌र्श्वनाथ जैन मंदिर में भगवान पा‌र्श्वनाथ मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा गाजे-बाजे के साथ की गई। पारसनाथ के कलिकुंड तीर्थ उदारक राजेंद्र सूरिस्वरजी महाराज के शिष्य राज परम सुरीश्वरजी महाराज आदि व साध्वी शीलरच्छिता महाराज व साध्वी दक्ष गुणाश्री महाराज सह दर्जनों साधु साध्वी ने प्रात: सात बजे विधिविधान के साथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा की।

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    जैनमंदिर निर्माण कार्य के लिए मध्यप्रदेश जबलपुर के श्रद्धालु दक्षा हरिषगाला परिवार की ओर से बड़ी रकम का सहयोग किया गया है। बिदापाथर के विजय पांडेय ने करीब दस डिसमिल जमीन दान की है। उक्त परिवार के सदस्य मंदिर प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल भी हुए। गुजरात से छह माह तक पैदल यात्रा कर बिदापाथर पहुंचे उपस्थित साधु- साध्वियों ने कहा कि सभी जीवों के प्रति दया का भाव रखें। हिसा से दूर रहकर अहिसा वादी बनें। अपने मन के भीतर उपजनेवाले गलत भावना से दूर रहें। हमारा उद्देश्य है कि मानव जाति मात्र में धर्म की भावना स्थिर है। हृदय से धर्म की भावना उत्पन्न हो जिससे परस्पर ज्ञान का दीपक जलाया जा सके। सभी जीवों के बीच प्रेम भावना बनाए रखने का प्रयास किया जा सके। कहा कि हमेशा परोपकार की भावना रखें। द्वेष ईष्र्या से दूर रहें। निश्चित रूप से जीवन खुशहाल व सुखमय होगा। सभी जीवों के प्रति प्रेम व सद्भावना रखें। कार्यक्रम को लेकर जैन समुदाय के लोगों में खासा उत्साह देखा गया।

    इस अवसर पर श्रीमती दक्ष हरीश, श्रीमती रिद्धि राहुल, चिराग कुमार, अमियरंजन माजि, भीमसेन माजि, आलोक माजि, नंदलाल माजि, सुवेंदु माजि, पूर्णचंद्र माजि, निमाई माजि, दुर्गादास माजि, अजय माजी, असित माजि, मकर माजि सहित बिदापाथर, कुंडहित, सालकुंडा आदि गांव के जैन समुदाय के लोग उपस्थित थे। मालूम हो कि करीब छह माह पूर्व जैन समुदाय की ओर से मधुवन से भगवान महावीर स्वामी की मूर्ति बिदापाथर लायी गई थी। तत्पश्चात बिदापाथर में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया था।