Diwali 2022 : दीपावली में कमल फूल के बिना अधूरी होती है मां लक्ष्मी की पूजा
दीपावली के दिन झारखंड में कमल फूल की मांग बढ़ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक फूलों का कारोबार 50 लाख से अधिक का है। इसे लेकर फूल बाजार भी सज गया है। बंगाल से फुलों की माला भी अत्यधिक मात्रा में आ चुकी है।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : दीपावली में शहर में बढ़ जाती है कमल फूल की मांग। कहते हैं कि कमल फूल के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी होती है। दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को चढ़ाने के लिए बहुत सारे फूल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन मान्यता है कि इस दिन बाकी फूलों से ज्यादा कमल के फूल का महत्व सबसे अधिक होता है। इस संबंध में पंडित सूरज झा कहते हैं कि पुराणों के अनुसार मां लक्ष्मी का एक नाम कमला या कमलासना भी है, जिसका मतलब होता है, कमल के उपर विराजमान होने वाली। पंडित सूरज झा कहते हैं कमल की एक बड़ी खूबी है कि वह कीचड़ में खिलने के बाद भी वह कीचड़ में लिप्त नहीं होता है। इसलिए माना जाता है कि जो भी लक्ष्मी पूजा के दिन मां लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित करता है, वह भी संसार में व्याप्त बुराइयों में लिप्त नहीं होता।
जमशेदपुर में 50 लाख से अधिक का कारोबार है फूल का
बाजार में बड़ी मात्रा में कमल का फूल आ चुका है। अधिकांश कमल का फूल पश्चिम बंगाल के बड़ा बाजार, पुरूलिया, बंदवान, झाड़ग्राम के अलावा जमशेदपुर के बहरागोड़ा, चाकुलिया, घाटशिला, पोटका, बोड़ाम व पटमदा क्षेत्र से आया है। साकची बाजार में कमल का फूल बिक्री कर रही राधा देवी नामक महिला ने बताया कि वह 10 रुपये प्रति पीस के दर से कमल का फूल बिक्री कर रहे हैं। इसी तरह बिष्टुपुर बाजार में कमल का फूल बिक्री कर रहे बड़ा बाजार निवासी युधिष्ठिर ने बताया कि वह बंदवान से फूल व धान की बाली बिक्री करने के लिए आए हैं। कमल फूल जहां 30 रुपये जोड़ा में बिकी कर रहे तो धान की बाली 15 रुपये में। फूल विक्रेताओं ने बताया कि शहर में धनतेरस से लेकर लक्ष्मी पूजा तक 50 लाख रुपये का कमल फूल बिक्री कर लेते हैं।
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