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    जंगली इलाके में अब 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन, जानिए क्‍या है वजह Jamshedpur News

    By Rakesh RanjanEdited By:
    Updated: Sat, 29 Feb 2020 03:14 PM (IST)

    Indian Railway. ट्रेन से हाथी के कटने के बाद रेलवे व वन विभाग की सहमति से निर्णय हुआ है कि जंगली इलाके में ट्रेन की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटे ही होगी।

    जंगली इलाके में अब 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन, जानिए क्‍या है वजह Jamshedpur News

    चाकुलिया (पूर्वी सिंहभूम), पंकज मिश्रा। Train Speed 40 Km Per hour In Forest Area For Prevent Elephant एलीफेंट कॉरिडोर के रूप में चिन्हित चाकुलिया वन क्षेत्र के जंगली इलाके में अब ट्रेनों की रफ्तार थम जाएगी। यहां से गुजरने के दौरान अब एक्सप्रेस व मेल समेत सभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

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    इस बात पर शुक्रवार को वन विभाग एवं रेल अधिकारियों के बीच सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई। तय किया गया कि रेल अधिकारी इससे संबंधित प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेज कर स्वीकृति प्राप्त करेंगे। दरअसल, शुक्रवार तड़के चाकुलिया व कोकपाड़ा स्टेशन के बीच पोल संख्या 188/ 22 के पास ट्रेन की चपेट में आकर एक जंगली हाथी की मौत हो गई। जिसके बाद वन विभाग के डीएफओ डॉ अभिषेक कुमार व रेंजर अशोक सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर गौरांग पाल से हाथियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की। इस दौरान इस बात पर सहमति बनी क‍ि दुर्घटना की संभावना को न्यूनतम करने के लिए ट्रेनों की गति कम कर दी जाए।

    लगेगाा हनी बी हूटर

    घटनास्थल पर रेलवे ट्रैक के नीचे एक अंडरपास बनाने पर भी सहमति बनी ताकि हाथी इसके नीचे से गुजर जाए तथा रेलवे ट्रैक पर ना चढ़े। इसके अलावा इस इलाके में रेलवे ट्रैक किनारे जगह-जगह हनी बी हूटर लगाने पर भी चर्चा की गई। हनी बी हूटर ऐसा उपकरण है जिससे मधुमक्खी की तरह आवाज निकलती है जिसे सुनकर हाथी इसके आसपास नहीं आते। इस संबंध में डीएफओ ने बताया कि हाथियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता देने के लिए जिन जगहों पर अंडरपास बनाने की आवश्यकता है उसे चिन्हित किया जा रहा है। रेल अधिकारियों से इस बाबत बात हो गई है।

    डेढ़ वर्ष पहले गिधनी में कट गए थे 3 हाथी

    खडग़पुर रेल मंडल पर डेढ़ वर्ष के भीतर ट्रेन की चपेट में आकर हाथियों के मरने की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व 7 अगस्त 2018 को चाकुलिया एवं गिधनी स्टेशन के बीच डुमरिया के पास तीन जंगली हाथी एक साथ कट गए थे। ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस की चपेट में आकर इन तीनों हाथियों की मौत हुई थी। उस समय भी जंगली हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था इसी दौरान हादसा हुआ था। उस हादसे में रेलवे के कई खंभे एवं तार भी गिर गए थे जिससे काफी क्षति हुई थी। लेकिन शुक्रवार को हुए हादसे में गनीमत यह रही कि रेलवे को कोई क्षति नहीं हुई।

    रेलवे ट्रैक से दूर दफनाया गया हाथी को

    डाउन कोरापुट एक्सप्रेस की चपेट में आकर मरे जंगली हाथी को पोस्टमार्टम के बाद रेलवे ट्रैक से दूर सुनसुनिया जंगल में दफना दिया गया। इसके लिए क्रेन बुलाना पड़ा। हालांकि घटनास्थल के आसपास भी खाली जमीन थी, लेकिन वहां नहीं दफनाया गया। इस संबंध में पूछने पर वन विभाग के रेंजर अशोक ङ्क्षसह ने बताया कि हाथी को रेलवे ट्रैक के समीप दफनाना उचित नहीं होता। उन्होंने बताया कि हाथी काफी संवेदनशील जीव होते हैं। उनके सूंघने की क्षमता भी काफी अधिक होती है। जिस जगह पर मृत हाथी को दफनाया जाता है। वहां रात में झुंड के अन्य हाथी पहुंचकर मातम मनाते हैं।

    रेलवे ट्रैक पर एक तरफ ही थी फेंसिंग

    रेलवे ट्रैक पर जिस जगह पर हाथी की मौत हुई वहां उत्तर की तरफ तो कटीले तारों की घेराबंदी यानी फेंसिंग थी लेकिन दक्षिण की तरफ नहीं थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि हाथी दक्षिण की तरफ यानी चतराडूबा गांव की ओर से आकर रेलवे ट्रैक पर चढ़े लेकिन सामने कटीले तारों की घेराबंदी होने के कारण हुए सीधा पार नहीं कर पाए। इस बीच तीव्र गति से डाउन लाइन पर आ रही कोरापुट एक्सप्रेस की चपेट में एक हाथी आ गया। जिस जगह पर दुर्घटना हुई वहां रेलवे ट्रैक घुमावदार है जिसके चलते चालक को दूर से हाथी दिखाई नहीं पड़ा होगा।