जितेंद्र सिंह, जमशेदपुर : पंजाब नेशनल बैंक से अरबों का घोटाला कर देश छोड़ भागे नीरव चौधरी और मेहुल चोकसी को वापस भारत लाने के गंभीर प्रयास हो रहे हैं। लेकिन एक दशक से ज्यादा हो गए, 4000 करोड़ के कोयला घोटाले के सरगना संजय चौधरी को सीबीआई अभी तक पकड़ नहीं पाई है। वह दुबई में ऐशो आराम की जिंदगी गुजार रहा है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है।

चौधरी से जुड़े दुबई के सूत्रों की माने तो वह दुबई में भारत के नौकरशाह सहित अन्य लोगों के पैसों को न सिर्फ खाड़ी देश में निवेश करवाता है, बल्कि वित्तीय सहायता भी मैनेज करता है। संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह क्षेत्र में उसका चूना पत्थर और कार्बन की खदानें हैं। पिछले साल संजय चौधरी को एक प्रसिद्ध बॉलीवुड स्टार और उनकी पत्नी की एक निजी पार्टी में देखा गया था, जिसका आयोजन दुबई में किया गया था। फिल्मी सितारों और राजनेताओं के परिवार से आने वाले इस अभिनेता का अपने जीवन में काफी समय तक खुद कानून से जूझना पड़ा था।

एयरलाइन के मालिक के लिए मैनेज कर रहे फंडिंग

सूत्र ने बताया कि संजय चौधरी एक एयरलाइन के मालिक के लिए धन की व्यवस्था भी कर रहा है और इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा निभा रहा है। यह एयरलाइंस वित्तीय कारणों से संकट में है। खाड़ी देश के अरबपतियों और इस एयरलाइंस के मालिक के बीच अच्छे संबंध भी हैं। सीबीआई ने 2018 तक चौधरी को प्रत्यर्पित करने का असफल प्रयास किया, लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरात की अदालत ने अरब नागरिकता देखते हुए उसे प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के पैसों का विदेश में खपाने का आरोप

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खास सहयोगी रहे संजय पर कोयला घाटाले के पैसों को विदेशों में निवेश करने का भी आरोप है। पहली बार सीबीआई ने संजय चौधरी को दुबई के बुर्ज खलीफा से नौ नवंबर 2011 में गिरफ्तार कर लिया था। मानगो का रहने वाला चौधरी उस समय संयुक्त राज्य अमीरात (यूएई) की नागरिकता ले चुका था, ऐसे में सीबीआई उसे अपने साथ नहीं ला पायी। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने संजय चौधरी का पासपोर्ट जब्त कर लिया था।

सीबीआई ने कसा शिकंजा तो भाग गया दुबई

सीबीआई की तरफ से संजय चौधरी को भारत लाने के लिए पिछले दस सालों में कई बार संयुक्त अरब अमीरात को पत्र लिखा, लेकिन वहां से कोई सकारात्मक जबाव नहीं मिला। कभी संजय चौधरी की गिनती मधु कोड़ा के सबसे करीबी लोगों में होती थी। वर्ष 2009 की बात है, जब सीबीआई और ईडी ने जब मधु कोड़ा व उनके सहयोगियों पर शिकंजा कसना शुरू किया, तब संजय चौधरी विदेश भाग गया था।

 

निर्दलीय विधायक होते हुए भी सीएम बन गए थे मधु कोड़ा

मधु कोड़ा निर्दलीय विधायक होेते हुए भी कांग्रेस राजद सहित अन्य क्षेत्रीय दलों के सहयोग से 2006 में सरकार बनाने में सफल रहे थे। वह सितंबर 2006 से अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री बने। अपने लगभग 24 महीने के कार्यकाल के दौरान कोड़ा ने मुख्यमंत्री की अपनी विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करते किया। उनपर आरोप है कि उन्होंने कोयला खदानों के आवंटन के एवज में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत ली, जिसमें से एक बड़ी राशि अन्य पार्टियों के साथ साझा की गई ताकि उन्हें सीएम की कुर्सी पर बने रहने दिया जा सके। बाकी बचे हिस्से को संजय चौधरी ने मनी लांड्रिंग के सहारे दुबई व अन्य देशों में निवेश किया।

झारखंड के आईपीएस अधिकारी की सिफारिश पर बना था पासपोर्ट

उस समय रिश्वत के पैसों को भारत में निवेश करना जोखिम भरा था, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर इस पैसे से भारत में संपत्ति खरीदी गई तो वह जब्त हो सकता है। ऐसे में संजय चौधरी दुबई निकल गए और वहां कई कंपनियों में निवेश किया। उनका भारतीय पासपोर्ट झारखंड कैडर के एक आईपीएस अधिकारी की सिफारिश पर बनाया गया था। बाद में यह अधिकारी एक बहुत लोकप्रिय और समृद्ध भारतीय खेल संघ का एक अभिन्न अंग बन गए। आज भी चौधरी की तस्वीर सीबीआई व इंटरपोल की वेबसाइटों पर वांटेड सेक्शन में लगा है। इस तस्वीर में उल्लेखित है कि उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस 2011 में जारी की गई थी। इस तस्वीर में उनका जन्म 11 फरवरी 1968 बताया गया है।

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