Jharkhand Politics: सूर्य सिंह बेसरा ने नए राज्यपाल रमेश बैस का किया स्वागत, संवैधानिक प्रावधानों पर आकृष्ट किया ध्यान, बताए लंबित मामले
आजसू के संस्थापक व झारखंड पीपुल्स पार्टी के प्रमुख अध्यक्ष पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने झारखंड के नए राज्यपाल रमेश बैस का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल को उन संवैधानिक मामलों की जानकारी दी है जो करीब 20 वर्ष से लंबित चल रहे हैं।

जमशेदपुर, जासं। आजसू के संस्थापक व झारखंड पीपुल्स पार्टी के प्रमुख अध्यक्ष पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने झारखंड के नए राज्यपाल रमेश बैस का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल को उन संवैधानिक मामलों की जानकारी दी है, जो करीब 20 वर्ष से लंबित चल रहे हैं। बेसरा ने उन्हें बताया है कि ये मामले कौन-कौन से हैं और उन्हें किस तरह निष्पादित किया जा सकता है।
झारखंड गठन से लेकर अब तक के लंबित मामले
- भारत का संविधान अनुच्छेद-3(क) के तहत देश के 28वें राज्य के रूप में 15 नवंबर 2000 में यानी भगवान बिरसा मुंडा को आदर्श का प्रतीक मानकर उनकी जयंती के पुनीत अवसर पर झारखंड की स्थापना हुई थी।
- झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है, जिसके अंतर्गत 24 जिले हैं। इनमें से 13 जिले संपूर्ण रूप से तथा 3 जिले का कुछ भाग संविधान की पांचवीं अनुसूची क्षेत्र अधिसूचित है, जहां अनुच्छेद- 244(1) का प्रावधान है।
- झारखंड देश के उन 10 राज्यों में से एक है, जहां संविधान का पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है। विडंबना यह है कि संसद द्वारा गठित "दिलीप सिंह भूरिया कमेटी" की अनुशंसा पर संविधान के 73वें संशोधन के बाद "पंचायत उपबंध-(अनुसूचित क्षेत्र पर विस्तार अधिनियम) 1996 अर्थात पेसा कानून-96 झारखंड में आज तक लागू नहीं हुआ, क्यों।
- संविधान की पांचवीं अनुसूची अनुच्छेद-244 (1) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध है। तदनुसार राष्ट्रपति के निर्देश से जनजाति सलाहकार परिषद स्थापित की जाएगी, जो 20 से अधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी। इसमें तीन चौथाई सदस्य आदिवासी प्रतिनिधि होंगे। जनजाति सलाहकार परिषद का यह कर्तव्य होगा कि वह उस राज्य की आदिवासियों के कल्याण और उन्नति संबंधित ऐसे विषयों पर सलाह दे, जो उनको राज्यपाल द्वारा निर्दिष्ट किए जाएं। परंतु वर्तमान राज्य सरकार ने संविधान में प्रावधानों के प्रतिकूल जनजाति सलाहकार परिषद का गठन कर लिया है, जो सरासर असंवैधानिक है। इसे रद करने की जरूरत है।
- झारखंड राज्य में झारखंडी बच्चे मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हैं। उन्हें मातृभाषा के प्रतिकूल हिंदी पढ़ने पर बाध्य किया जाता है, जबकि संविधान के अनुच्छेद- 350(क) में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति का सभी राज्यों को निर्देश है।
आशा है नए राज्यपाल उपर्युक्त ज्वलंत मुद्दों पर विशेष ध्यान देंगे। राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 154, 163, 167, 175 के मद्देनजर झारखंडी जनाकांक्षा के अनुरूप ऐतिहासिक कदम उठाएंगे।
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