वाह स्कूल हो तो ऐसा! रामजी की पूजा किए बिना टिफिन नहीं खाते बच्चे, प्रभु की आरती करने के बाद करते हैं पढ़ाई स्टार्ट
गम्हरिया का नव ज्योति विद्या मंदिर झारखंड का इकलौता स्कूल जहां राम दरबार स्थापित है। यह स्कूल अपने आप में बेहद खास है। यहां बच्चे हर दिन रामजी की आरती भजन और मंत्र उच्चारण के बाद ही पढ़ाई शुरू करते हैं। टिफिन के वक्त बच्चे सीधा खा नहीं लेते हैं बल्कि पहले मंत्र पढ़कर उसे ग्रहण करते हैं । यहां बच्चे अन्न बर्बाद नहीं करने का भी संकल्प भी लेते।

वेंकटेश्वर राव, जमशेदपुर। अयोध्या राम मंदिर में 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के मद्देनजर पूरा देश राममय हो चला है। स्कूली बच्चे और शिक्षक भी इससे अछूते नहीं हैं। अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन को लेकर देशभर में उत्साह और उमंग का माहौल है। सरायकेला- खरसावां जिला स्थित गम्हरिया के नव ज्योति विद्या मंदिर स्कूल के बच्चे और शिक्षक पूजित अक्षत के साथ घर-घर निमंत्रण लेकर पहुंच रहे हैं।
मंत्र पढ़ने के बाद टिफिन खाते हैं बच्चे
नव ज्योति विद्या मंदिर झारखंड का इकलौता स्कूल है, जहां स्कूल परिसर में ही राम मंदिर और राम दरबार भी है। खास बात यह है कि नव ज्योति विद्या मंदिर के बच्चे हर दिन रामजी की आरती, भजन और मंत्र उच्चारण के बाद ही पढ़ाई शुरू करते हैं। इस स्कूल में जब टिफिन होती है, तो बच्चे सीधे टिफिन नहीं खाते, वे पहले मंत्र पढ़कर उसे ग्रहण करते हैं । इतना ही नहीं भोजन मंत्र के माध्यम से बच्चे अन्न बर्बाद नहीं करने का भी संकल्प भी लेते हैं।
बच्चों को रोज दी जा रही हैं प्रभु श्री राम की जानकारी
अयोध्या में राम मंदिर बनने और उद्घाटन की तिथि तय होने के बाद से बच्चों में प्रभु राम के बारे में जानने को लेकर काफी जिज्ञासा बढ़ रही है। स्कूल प्रबंधन द्वारा जिज्ञासा को शांत करने के लिए प्रभु श्रीराम के बारे में बच्चों को जानकारियां दी जा रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर स्कूल प्रबंधन ने यह पहल किया है कि स्कूल में अब रेगुलर कोर्स के अलावा संविधान की पढ़ाई और आध्यात्मिक पढ़ाई भी कराई जा रही है।
गम्हरिया के नव ज्योति विद्या मंदिर स्कूल की आजकल इलाके में काफी चर्चा है और आसपास के लोग तथा अभिभावक इस संस्कारी शिक्षा के कायल हो गए हैं ।
कक्षा केजी से लेकर आठवीं तक होती है पढ़ाई
प्रिंसिपल संजय श्रीवास्तव।
हम चाहते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को अध्यात्मिक ज्ञान भी मिले। अध्यात्म के माध्यम से ही परिवार जुड़ा रहता है। इससे माता-पिता के महत्व को आसानी से समझाया जा सकता है। अपने परिवार और माता-पिता को भगवान के रूप में समझना चाहिए। वे बहुमूल्य है। इस कारण स्कूल में आध्यात्मिक शिक्षा भी दी जा रही है। स्कूल में ही राम दरबार सजा हुआ है- संजीव श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, नव ज्योति विद्या मंदिर स्कूल, गम्हरिया।
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