Nana patekar नहीं रहे, लेकिन जमशेदपुर में गूंज रहा उनका 2004 का संदेश; छात्रों से कहा था- जमीन से जुड़े रहो, सैलरी पैकेज से आगे सोचो
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है, जमशेदपुर भी उनकी पुरानी यादों ...और पढ़ें

वर्ष 2004 में एक्सएलआरआई में आयोजित नेशनल यूथ फेस्टिवल पाटेकर ने डेढ़ घंटे तक छात्रों से सीधा संवाद कर उन्हें किताबी ज्ञान से बाहर निकलकर जमीन से जुड़ने का मूलमंत्र दिया था।
HighLights
नाना पाटेकर के निधन से देशभर में शोक की लहर।
जमशेदपुर में उनकी 2004 की XLRI यात्रा याद की गई।
युवाओं को जमीनी हकीकत समझने का दिया था संदेश।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से देशभर के साथ जमशेदपुर में भी शोक की लहर है। उनके निधन के साथ शहर से जुड़ी उनकी पुरानी यादें भी ताजा हो गई हैं।
वर्ष 2004 में एक्सएलआरआइ में आयोजित नेशनल यूथ फेस्टिवल में नाना पाटेकर ने छात्रों से करीब डेढ़ घंटे तक सीधा संवाद किया था।
अपने बेबाक और जमीनी अंदाज में उन्होंने युवाओं को किताबी ज्ञान तक सीमित न रहने और समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने की सीख दी थी।
इससे करीब एक दशक पहले, वर्ष 1994 में भी नाना पाटेकर जमशेदपुर आए थे। शहर में आयोजित एक प्रतिष्ठित बैडमिंटन टूर्नामेंट में वह खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि के रूप में जेआरडी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचे थे। यह वही दौर था, जब उनकी चर्चित फिल्म ‘क्रांतिवीर’ रिलीज हुई थी।
किताबी ज्ञान तक सीमित न रहने की दी थी सीख
वर्ष 2004 में एक्सएलआरआइ में देश के शीर्ष बिजनेस स्कूलों में शामिल संस्थान के भावी प्रबंधकों को संबोधित करते हुए नाना पाटेकर ने युवाओं को अपने खास अंदाज में प्रेरित किया था।
उन्होंने कहा था कि बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल करना और वातानुकूलित कमरों में बैठकर कॉरपोरेट रणनीतियां बनाना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। युवाओं को देश की वास्तविक समस्याओं, गरीबी और किसानों की स्थिति को समझने के लिए जमीन पर उतरना होगा।
सैलरी पैकेज तक सीमित न रहें युवा
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने उनसे अभिनय, बॉलीवुड और राजनीति से जुड़े कई सवाल पूछे थे। नाना पाटेकर ने बेबाकी से उनके जवाब दिए।
अपनी चर्चित फिल्म क्रांतिवीर का संदर्भ देते हुए उन्होंने सामाजिक बदलाव के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने और व्यवस्था की खामियों के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत पर जोर दिया था।
उन्होंने युवाओं को आगाह किया था कि यदि पढ़ा-लिखा वर्ग सिर्फ अपने करियर और सैलरी पैकेज तक सीमित रह जाएगा, तो समाज में व्यापक बदलाव संभव नहीं होगा।
बड़े फिल्म स्टार होने के बावजूद नाना पाटेकर का अंदाज बेहद सहज और जमीनी था। उन्होंने औपचारिकता से हटकर छात्रों के बीच जाकर संवाद किया था।
करीब डेढ़ घंटे तक चले इस संवाद के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। आज उनके निधन के बाद एक्सएलआरआइ के पूर्व छात्र और जमशेदपुरवासी उस यादगार मुलाकात को भावुक होकर याद कर रहे हैं।
