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नाना पाटेकर जब फिल्मी करियर छोड़ कारगिल युद्ध में शामिल होने के लिए पहुंच गए थे, देशप्रेम की अनकही दास्तान

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:23 PM (IST)

नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया, लेकिन उनका देशप्रेम और सेना से गहरा जुड़ाव हमेशा याद ...और पढ़ें

कारगिल में सैनिकों संग 60 दिन बिताए, फिल्मी करियर त्यागा।

कारगिल में सैनिकों संग 60 दिन बिताए, फिल्मी करियर त्यागा।

HighLights

  1. नाना पाटेकर का 2026 में निधन, देशप्रेम के लिए याद।

  2. कारगिल में सैनिकों संग 60 दिन बिताए, फिल्मी करियर त्यागा।

  3. 'प्रहार' हेतु तीन साल सेना के साथ गहन प्रशिक्षण।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित घर पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टर उन्हें नहीं बचा पाए। डॉक्टर ने करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर दिया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। बता दें नाना पाटेकर का सुहग 5:20 मिनट पर निधन हो गया था ।

देशप्रेम के लिए फैंस के दिलों पर करते थे राज

बॉलीवुड की दुनिया में खूब नाम कमाने के बाद भी नाना पाटेकर काफी सादगी भरा जीवन जीते थे। इसके साथ ही वे अपने देशप्रेम के लिए भी फैंस के दिलों पर राज करते हैं, उन्होंने कई बार भारतीय सौनिकों के लिए फंड भी जुटाए थे।

नाना पाटेकर का सेना से था खास लगाव

नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव कारगिल युद्ध से कई साल पहले ही शुरू हो गया था। दरअसल फिल्म 'प्रहार: द फाइनल अटैक' की तैयारी के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की थी। फिल्म में उन्होंने मेजर चौहान का रोल निभाया था। उनके लिए ये अनुभव इसलिए भी खास था क्योंकि उन्होंने खुद इस फिल्म का निर्देशन भी किया था।

इस फिल्म की ट्रेनिंग के कारण उन्हें सैनिकों के तौर तरीकों का पहले से अनुभव था। भारतीय सेना से जुड़ाव के कारण 1999 में कारगिल युद्ध के समय उनका जवानों के साथ जाने का मन हुआ।

कारगिल के समय जब फिल्मी करियर को किया साइड

साल 1999 में कारगिल युद्ध के समय उन्होंने अपने फिल्मी करियर को साइड में रख दिया था और सेना के जवानों के साथ मोर्चे तक पहुंचे थे। इसके लिए उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी।

कारगिल युद्ध से पहले नाना पाटेकर की कई फिल्में हिट रहीं थीं। इसमें ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘अग्निसाक्षी’ के अलावा और भी कई फिल्में शामिल हैं।

उस वक्त तक, उन्हें फिल्मों में किए काम के लिए दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका था। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने फिल्मी करियर को साइड में रखते हुए कारगिल युद्ध में जाने के बारे में सोचा।

कारगिल में 60 दिन तक सैनिकों के साथ रहे नाना

एक इंटरव्यू के दौरान नाना पाटेकर ने बताया था कि उन्होंने कारगिल के दौरान करीब 60 दिन सेना के साथ बिताए थे। वह क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा भी रहे।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने लाइन ऑफ कंट्रोल के पास भारतीय जवानों के साथ समय बिताया और कुछ वक्त बेस अस्पताल में भी काम किया।

कारगिल में मुश्किल हालात का असर उनकी सेहत पर भी पड़ा था। नाना ने बताया था कि जब वो कारगिल में गए थे तब वो करीब 76 साल के थे और वापस लौटने के दौरान उनका वजन घटकर 56 किलो हो गया था। यानी दो महीनों में उनका वजन करीब 20 किलो कम हो गया था।

पहली बार में कारगिल जाने की नहीं मिली थी इजाजत

नाना पाटेकर ने पहले सेना के सीनियर अधिकारियों से जवानों के साथ जाने के लिए पूछा था लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली। उन्हें बताया गया कि इस तरह की मंजूरी सिर्फ रक्षा मंत्री दे सकते हैं।

इसके बाद नाना ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से बात की। शुरुआत में रक्षा मंत्री ने भी उन्हें मना कर दिया था। लेकिन नाना ने उन्हें अपनी सैन्य ट्रेनिंग के बारे में बताया जिसके बाद उन्हें कारगिल में जाने की अनुमति मिली थी।

फैंस के दिलों पर छाये देशभक्ति वाले किरदार

नाना पाटेकर ने अपनी फिल्मों में भी भारतीय सेना और देशप्रेम से जुड़े कई रोल्स किए हैं। 1991 की 'प्रहार' में उन्होंने मेजर चौहान का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके किरदार में उनकी ट्रेनिंग की झलक साफ दिख रही थी।

1999 में फिल्म कोहराम में उन्होंने मेजर अजीत आर्या का रोल किया था। फिल्म में उन्होंने एक आर्मी इंटेलिजेंस ऑफिसर का किरदार निभाया था।

साल 1993 में फिल्म तिरंगा में इंस्पेक्टर शिव प्रताप सिंह, फिल्म क्रांतिवीर में प्रताप नारायण तिलक और यशवंत में यशवंत लोहार का किरदार निभाया था।

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