Jamshedpur: रेलवे से जमीनी विवाद में सीनियर टेक्नीशियन ने खुद को लगाई आग, हालत गंभीर
Jharkhand Crime झारखंड में जमीनी विवाद में टाटानगर इलेक्ट्रिक लोको शेड में सीनियर टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत सुनील कुमार पिल्ले (57 वर्ष) में आत्मदाह कर लिया। लगभग 70 प्रतिशत जल चुके सुनील की हालत गंभीर है। उन्हें टीएमएच में भर्ती कराया गया है। बागबेड़ा रोड में डोसा कार्नर के पीछे न्यू क्रू लॉबी के पास एक खाली जमीन है।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर: झारखंड में जमीनी विवाद में टाटानगर इलेक्ट्रिक लोको शेड में सीनियर टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत सुनील कुमार पिल्ले (57 वर्ष) में आत्मदाह कर लिया। लगभग 70 प्रतिशत जल चुके सुनील की हालत गंभीर है। उन्हें टीएमएच में भर्ती कराया गया है।
बागबेड़ा रोड में डोसा कार्नर के पीछे न्यू क्रू लॉबी के पास एक खाली जमीन है। रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियरिंग (एसएसई) विभाग के कर्मचारी लेवी देने वाले ओम प्रकाश को कब्जा दिलाने व निर्माण कार्य शुरू कराने गए थे।
विरोध करते हुए सतीश की पत्नी नीरू पिल्ले ने जमीन के समीप स्थित क्वार्टर से अपने ऊपर किरोसिन छिड़क कर पहुंच गई और आत्मदाह करने का प्रयास किया।
इस पर आरपीएफ के जवानों ने महिला और उनकी दो बेटियों, अंजली पिल्ले व मनीषा पिल्ले को रोका और हिरासत में लेकर थाने ले आई, जबकि पीछे क्वार्टर में मौजूद रेल कर्मचारी सतीश ने अपने ऊपर किरोसिन छिड़क कर आत्मदाह कर लिया।
11 वर्षों से लेवी भर रहा ओम प्रकाश
रेल प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2004-05 में रेलवे ने एक कानून के तहत उन सभी दखलदारों को जमीन लीज पर दे दी थी, जिनके पास वर्तमान में कब्जा था।
उक्त जमीन पर कभी भी किसी पिल्ले परिवार का कब्जा नहीं था। यह जमीन पूर्व में अंबिका तिवारी के नाम से रिकॉर्ड में है और पिछले 11 वर्षों से उक्त जमीन पर ओम प्रकाश दखलदार है।
ओम प्रकाश ही रेलवे को लेवी देता है, लेकिन जब भी वह जमीन पर किसी तरह के निर्माण कार्य की शुरूआत करता है, तो पिल्ले परिवार विरोध करता है।
विगत 14 जून को विभाग की ओर से पत्र जारी कर ओम प्रकाश को कब्जा दिलाने का आदेश जारी किया गया। साथ ही इसकी सूचना बागबेड़ा थाने को भी दी गई।
बुधवार की सुबह जब टीम पहुंची तो नीरू पिल्ले ने आत्मदाह करने का प्रयास किया। सरकारी काम में बाधा व किसी अनहोनी को रोकने के लिए आरपीएफ ने नीरू व उसकी दो बेटियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, शाम में उनके स्वजनों द्वारा दिए गए शपथ पत्र के आधार पर छोड़ दिया गया।
दादा के नाम पर है जमीन
सतीश पिल्ले की बेटी अंजली का कहना है कि उक्त जमीन उसके दादा रामनाथ पिल्ले के नाम पर है, जिसे वर्ष 1985 से रेलवे द्वारा लीज में मिला है। तब से उनका ही कब्जा है, लेकिन ओम प्रकाश वर्ष 2011 में कहां से पावर ऑफ एटर्नी लेकर अपना कब्जा बता रहा है।
हमने जमीन के संबंध में आरटीआइ किया है, जिसमें रेल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे किसी तरह की जमीन लीज पर नहीं देता। जमीन विवाद पर उनका मामला डीसी कोर्ट में भी विचाराधीन है।
इसके बावजूद जबरन हमारी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। इसमें एसएसई विभाग व आरपीएफ ने भी आरोपित का साथ दिया।
अंजली ने कहा कि मेरे पापा ने सुबह आत्मदाह कर लिया, लेकिन आरपीएफ की संवेदनहीनता ऐसी कि जानकारी होने के बावजूद हमें शाम साढ़े छह बजे थाने से छोड़ा गया। मेरे पिता के आत्मदाह के लिए टाटानगर एसएसई व आरपीएफ के अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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