Jamshedpur Crime: मनोज सरकार, अखिलेश गैंग और रेलवे ठेकेदारी... जानें बिंदल मॉल गोलीकांड की Inside Story
सोनारी के बिंदल मॉल में हुई गोलीबारी ने जमशेदपुर के आपराधिक जगत में पुराने गिरोहों के बदलते समीकरणों और अंदरूनी अदावत को उजागर किया है।

HighLights
बिंदल मॉल फायरिंग ने जमशेदपुर के आपराधिक जगत में पुरानी अदावत उजागर की।
मनोज सरकार, अखिलेश गैंग के बदलते समीकरणों और ठेकेदारी विवाद की जांच।
पुलिस जमीन कारोबार, रेलवे ठेकेदारी में वर्चस्व की कड़ियां जोड़ रही है।
जासं, जमशेदपुर। सोनारी स्थित मरीन ड्राइव के बिंदल मॉल रेस्टोरेंट में हुई हालिया ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद जमशेदपुर शहर के अपराध जगत में पुराने गिरोहों के बदलते समीकरणों और अंदरूनी अदावत की परतें तेजी से खुलने लगी हैं।
पुलिस की जांच में सामने आए मुख्य आरोपियों के नाम और दर्ज पुराने आपराधिक मामलों को यदि आपस में जोड़कर देखा जाए, तो वर्ष 2020 के आसपास अखिलेश सिंह गिरोह के समानांतर एक नया आपराधिक नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश से जुड़े रहे कई प्रमुख चेहरों के रिश्ते अब पूरी तरह बदल चुके हैं।
कभी एक ही आपराधिक सिंडिकेट के बेहद करीब रहे लोगों के बीच बाद में वर्चस्व, जमीन कारोबार और ठेकेदारी को लेकर भीषण दुश्मनी व सीधा टकराव सामने आया है।
पुराने रिकॉर्ड खंगालने में जुटी पुलिस
सोनारी बिंदल मॉल फायरिंग मामले में पुलिस ने कदमा निवासी अजीत मंडल और सोनारी निवासी मोहन यादव को प्राथमिकी (FIR) में नामजद किया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन दोनों ही आरोपियों के नाम कुख्यात अखिलेश सिंह के धुर विरोधी रहे सोनारी के शिवगंगा अपार्टमेंट निवासी अमित राय हत्याकांड से भी सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं।
मोहन यादव को इस सनसनीखेज हत्याकांड के मामले में अदालत की ओर से सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा, पुलिस जांच में दोनों के नाम समय-समय पर अखिलेश सिंह गिरोह से जुड़ी विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में भी प्रमुखता से सामने आते रहे हैं।
अब बिंदल मॉल के रेस्टोरेंट में हुई इस गोलीबारी में इन दोनों के नाम आरोपी के तौर पर सामने आने के बाद शहर के पुराने आपराधिक समीकरणों को एक बार फिर पुलिस जांच के केंद्र में ला दिया है।
पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम अब यह कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि बीते वर्षों के दौरान इन चेहरों के बीच आपस में रिश्ते कब, क्यों और कैसे बदले?
पुलिस इस बिंदु पर भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या पुरानी रंजिश, जमीन-जायदाद का कारोबार अथवा रेलवे ठेकेदारी में वर्चस्व की कोई कड़ी इस खूनी फायरिंग तक पहुंची है।
कभी साथ रहे सहयोगी अब एक-दूसरे के आमने-सामने
बिंदल मॉल फायरिंग की घटना में गंभीर रूप से घायल हुए डोमनिक सैमसन का नाम भी शहर के पुराने आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ लगातार सामने आता रहा है।
बताया जाता है कि वह एक दौर में कुख्यात मनोज सरकार और टीटू शर्मा का बेहद करीबी सहयोगी हुआ करता था। हालांकि, बाद के दिनों में इनके बीच आपसी रंजिश और अदावत की बात खुलकर सामने आने लगी थी।
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में अब इसी पुराने नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे लोगों के नाम फायरिंग मामले में सामने आने के बाद कई पुराने कनेक्शन और अनसुलझे मामले फिर से जांच के दायरे में आ गए हैं।
गौरतलब है कि रेस्टोरेंट के अंदर हुई इस अंधाधुंध फायरिंग में कुल चार लोग घायल हुए थे। पुलिस प्रशासन इस घटना को केवल किसी तात्कालिक कहासुनी या विवाद के रूप में नहीं देख रहा है।
बल्कि इसके पीछे शहर में जमीन कारोबार, आपराधिक वर्चस्व, रेलवे ठेकेदारी में दबदबा और पुराने गिरोहों के बीच बने व बिगड़े रिश्तों के लंबे सिलसिले को भी अपनी विस्तृत जांच में शामिल किया है।
2020 में समानांतर नेटवर्क खड़ा करने की हुई थी कवायद
पुलिस रिकॉर्ड्स और पुराने दर्ज केसों के अध्ययन से यह साफ होता है कि कुख्यात मनोज सरकार ने परमजीत सिंह गिरोह से जुड़े कुछ अन्य अपराधियों के साथ मिलकर वर्ष 2020 के आसपास शहर में एक नया और समानांतर नेटवर्क खड़ा करने की बड़ी कोशिश की थी।
इस पूरे नेटवर्क में अधीर प्रधान, शंकर मुंडा, दीपू ओझा, ज्ञानी कुमार साहू, देवव्रत गोस्वामी, सुशांत प्रधान, संतोष बानरा, टोटन दत्ता, आदिल, कृष्णा राव, संतोष पाठक और विजय साहू समेत कई अन्य चर्चित नाम सामने आते रहे हैं।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए नेटवर्क की मुख्य गतिविधियों में चक्रधरपुर रेल मंडल में रेलवे ठेकेदारी, बड़ी औद्योगिक कंपनियों के ठेके हासिल करना, कीमती जमीनों की खरीद-बिक्री में दखल देना और कारोबार में अपना एकछत्र वर्चस्व कायम करने की कोशिशें शामिल थीं।
इस गिरोह से जुड़े कई अपराधियों के खिलाफ जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) और पड़ोसी जिले सरायकेला-खरसावां के विभिन्न थानों में हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम जैसे संगीन और गंभीर अपराधों के दर्जनों मामले दर्ज हैं।
विजय पांडेय हत्याकांड और मनोज सरकार का आपराधिक इतिहास
परसुडीह क्षेत्र का रहने वाला मनोज सरकार का नाम चर्चित रेलवे ठेकेदार विजय पांडेय हत्याकांड में प्रमुखता से सामने आया था। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने उसे वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था।
उस समय पुलिस रिकॉर्ड में मनोज सरकार पर एक लाख रुपये का नकद इनाम घोषित होने का भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इसके बाद, दिसंबर 2020 में आरआइटी (RIT) थाना पुलिस ने मनोज सरकार समेत उसके नौ सक्रिय सहयोगियों को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था।
मनोज सरकार का आपराधिक दायरा काफी विस्तृत रहा है। उसके खिलाफ चक्रधरपुर में रेलवे ठेकेदार बलराम सिंह की निर्मम हत्या, ओडिशा के क्योंझर जिले में हत्या, आमदा ओपी क्षेत्र में चर्चित व्यवसायी पटेल महतो की हत्या, रेलवे ठेकेदारों से मोटी रंगदारी वसूलने और कुचाई क्षेत्र में रंगदारी मांगने समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं।
वर्तमान में जमशेदपुर के परसुडीह, बर्मामाइंस के साथ-साथ चक्रधरपुर, आरआइटी और आदित्यपुर थानों में उसके खिलाफ करीब 10 से अधिक आपराधिक मामलों का पुलिस रिकॉर्ड दर्ज है।
टीटू शर्मा के खिलाफ दर्ज हैं दर्जनों संगीन मामले
मनोज सरकार के सहयोगी अमित शर्मा उर्फ टीटू शर्मा के खिलाफ भी पुलिस फाइल में करीब एक दर्जन संगीन आपराधिक मामलों का स्पष्ट उल्लेख है।
आपराधिक सफर की शुरुआत में वह ओडिशा के कुख्यात अपराधी करण सिंह का मुख्य सहयोगी माना जाता था। बाद के वर्षों में मनोज सरकार के साथ उसकी सक्रियता चक्रधरपुर रेलवे मंडल क्षेत्र में करोड़ों रुपये के ठेके मैनेज कराने, टेंडर डालने और स्थानीय ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने से जोड़कर देखी जाती रही है।
रेलवे ठेकेदार विजय पांडेय हत्याकांड के मामले में अदालत द्वारा टीटू शर्मा को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा चुकी है और वह फिलहाल अदालत से जमानत पर बाहर है।
उसके खिलाफ जमशेदपुर के परसुडीह, गोलमुरी और पश्चिम सिंहभूम के चक्रधरपुर थाने में हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले से जुड़े विभिन्न मामले दर्ज हैं।
फिलहाल, पुलिस बिंदल मॉल फायरिंग की कड़ियों को मनोज सरकार, टीटू शर्मा, अजीत मंडल और मोहन यादव के पुराने आपसी रिश्तों और हालिया रंजिश से जोड़कर गहन तफ्तीश कर रही है, ताकि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे छिपे मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचा जा सके।
