Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Yoga Tips : शरीर में ताकत एवं नई उर्जा का संचरण करना है तो करें वीरभद्रासन, बता रहीं योग एक्सपर्ट रूमा शर्मा

    By Rakesh RanjanEdited By:
    Updated: Sun, 21 Nov 2021 08:04 PM (IST)

    Yoga Tips वीरभद्रासन यदि नियमित किया जाए तो मनुष्य को किसी भी प्रकार का रोग छू तक नहीं सकता। यह आसन उन्हीं लोगों को करने को कहा जाता है जो अपने शरीर में बल और स्फूर्ति पाना चाहते हैं। रूमा शर्मा बता रहीं योग करने के तरीके व होनेवाले फायदे।

    Hero Image
    जमशेदपुर की प्रसिद्ध योग एक्सपर्ट रूमा शर्मा।

    जागरण संवादाता, जमशेदपुर : वीरभद्रासन योग इसे अंग्रेजी भाषा में वॉरियरपोज वन कहा जाता है। इसे योद्धाओं का आसन कहा जाता है। यही कारण है कि इस आसन को करने से कई बीमारियां तो दूर होती ही हैं साथ में शरीर में ताकत व नई उर्जा का संचरण होता है। जमशेदपुर की प्रसिद्ध योग एक्सपर्ट रूमा शर्मा कहती हैं कि वीरभद्रासन को यदि नियमित किया जाए तो मनुष्य को किसी भी प्रकार का रोग छू तक नहीं सकता। यह आसन उन्हीं लोगों को करने को कहा जाता है, जो अपने शरीर में बल और स्फूर्ति पाना चाहते हैं। रूमा शर्मा बता रहीं योग करने के तरीके व उससे होने वाले फायदे।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    वीरभद्रासन करने के फायदे

    • वीरभद्रासन योग करने से शरीर के अंदर ताजी हवा का आना-जाना बेहतर तरीके से होता है। हवा की ताजगी के कारण सांस नली का रास्ता साफ रहता है। इससे किसी भी प्रकार की एलर्जी से बचाव होता है।
    • वीरभद्रासन करने पर नाक के रास्ते से हवा ज्यादा मात्रा में भीतर जाती है। इससे सांस के साथ ऑक्सीजन शरीर के भीतर जाती है, जिससे ब्लड फ्लो तेज हो जाता है।
    • वीरभद्रासन करने से पूरे शरीर का विकास करने वाले हार्मोन का उत्पादन संतुलित तरीके से होता है। जिससे पूरे शरीर का मसल्स को फिट रखने में मदद करता है। 
    • वीरभद्रासन करने से शरीर को गहरा स्ट्रेच मिलता है, इससे पैर की मांसपेशियां हिप्स का मांसल भाग, ग्लूट्स, पिंडली, जांच की भीतरी मांसपेशियां आदि को गठीला बनाने में मदद मिलती है। 
    • वीरभद्रासन करने से जांघों, हिप्स, कंधों, हाथों और गर्दन को फैलाना और खींचना होता है। इससे शरीर के अतिरिक्त फैट को बर्न करने और इन मसल्स को टोन करने में मदद मिलती है। इसे करने से शरीर बेहतर दिखाई देता है।
    • वीरभद्रासन की तुलना योद्धा से की जाती है। यही कारण है कि इस आसन को करने वालों के शरीर में चेतना, स्थिरता और स्टेमिना बढ़ाने में मदद मिलती है।
    • वीरभद्रासन एक थेरेपी की तरह काम करता है। इससे कई बीमारियों जैसे अस्थामा, साइटिका, इंसाेम्निया को दूर करने में किसी थेरेपी की तरह काम करता है।
    • वीरभद्रासन करने से डायफ्राम को फैलाना होता है, जिससे श्वसन तंत्र बेहतर काम करने लगता है। इससे अस्थमा के मरीजों को मदद मिलती है।
    • वीरभद्रासन का नियमित अभ्यास से अनिद्रा जैसी बीमारी को दूर करने में मदद मिलती है। इससे आंतरिक अंग बेहतर तरीके से काम करती है।
    • नियमित वीरभद्रासन करने से पेट के निचले हिस्से की मसल्स के साथ ही पाचन तंत्र और गुप्ताओं की मांसपेशियां भी अच्छी तरह काम करनी शुरू कर देती है। कंधों और गर्दन के आसपास की सूजन को कम करने में मदद करता है।

    वीरभद्रासन करने का तरीका

    योग एक्सपर्ट रूमा शर्मा कहती हैं कि वीरभद्रासन करने के लिए धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाएं। कभी भी असुविधा होने पर इस आसन का अभ्यास नहीं करें। कभी भी कंधों या घुटनों पर दबाव नहीं डालें। हमेशा ध्यान दें कि आने वार्मअप कर लिया हो और आपकी कोर मसल्स एक्टिव हो चुकी हो। किसी भी समय आपको किसी किस्म की असुविधा या दर्द महसूस होता है तो खुद पर जरा भी दबाव न डालें, धीरे-धीरे आसन का अभ्यास बंद कर दें और आराम करें। यदि आप पहली बार इस आसन को कर रहे हैं तो किसी योग एक्सपर्ट के देखरेख में करें।

    वीरभद्रासन करने के तरीके

  • योग मैट बिछाकर उस पर सीधे खड़े हो जाएं
  • दोनों पैरों के बीच तीन से 3.5 फीट का अंदर करें।
  • दोनों हाथों को उपर की ओर उठाते हुए जमीन के समानांतर ले आएं।
  • दोनों हाथों की हथेलियों को सिर के उपर ले जाकर आपस में जोड़ लें
  • दाएं पैर के पंजे को 90 डिग्री के कोण पर घुमाएं।
  • इसके बाद बाएं पैर के पंजे को 45 डिग्री पर घुमाएं, पैरोंं को स्थिर रखें।
  • उपर के धड़ को दाएं पैर की तरफ घुमाएं
  • अब तक मुंह भी 90 डिग्री के कोण पर घूम चुका होगा
  • दाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए 90 डिग्री का कोण बनाएं
  • दाईं जांघ को फर्श के समानांतर ले आएं, बायां पैर एकदम सीधा रहेगा।
  • सिर के पिछे की ओर झुकाएं और उपर की तरफ देखें।
  • इस स्थित में 30 से 60 सेकेंड तक बने रहें।
  • अब पुरानी स्थिति में आ जाएं।
  • इसी तरह की प्रक्रिया दूसरे पैर से भी करेंगे।