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    नौकरी हो या राजनीति हर जगह चर्चा के केंद्र में रहे डॉ अजय कुमार, ये रहा सफरनामा

    By Rakesh RanjanEdited By:
    Updated: Thu, 19 Sep 2019 01:12 PM (IST)

    DR Ajay Kumar. पहले डॉक्टर फ‍िर भारतीय पुलिस सेवा कॉरपोरेटर और राजनीति के हर सफर में डॉ अजय कुमार चर्चा के केंद्र में रहे।

    नौकरी हो या राजनीति हर जगह चर्चा के केंद्र में रहे डॉ अजय कुमार, ये रहा सफरनामा

    जमशेदपुर, जेएनएन। आम आदमी पार्टी राजनीति में डॉ अजय कुमार का तीसरा पड़ाव है। पहले डॉक्टर, फ‍िर भारतीय पुलिस सेवा, कॉरपोरेटर और राजनीति के हर सफर में वे चर्चा के केंद्र में रहे।

    10 अगस्त 1962 को कर्नाटक के मंगगोर में पैदा हुए डॉ अजय ने सबसे पहले जवाहरलाल इंस्टीच्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एडुकेशन एंड रिसर्च पांडुचेरी से 1985 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1986 में उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन कर ली। 1986 में वे राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजे गए थे।

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    आइपीएस अधिकारी अजय से अपराधी खाते थे खौफ

    डॉ अजय कुमार 1994 से 1996 के बीच जमशेदपुर के एसपी रहे। इस दौरान बेहतर पुलिसिंग का नमूना जमशेदपुर के लोगों ने देखा था। अपराधियों में उनके नाम का इस कदर खौफ था कि सभी अपराधी भूमिगत हो गए थे। उस समय के कुख्यात कई अपराधियों ने तो शहर से ही तौबा करने में भलाई समझी थी। बेहतर पुलिसिंग की वजह में कानून का राज कायम होने की वजह से यहां के लोगों ने उन्‍हें सिर आंखों पर बिठाया था।  

    आइपीएम की नौकरी छोड़ टाटा समूह से जुड़े

    1996 में आइपीएस की नौकरी छोड़कर डॉ अजय टाटा समूह से जुड़े। समूह ने उन्हें बड़े ओहदे पर बिठाया। हालांकि, कुछ दिनों बाद उन्होंने टाटा समूह से भी नाता तोड़ लिया और राजनीति की राह के राही बन गए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की सदारत वाली झारखंड विकास मोर्चा से 2011 का लोकसभा उपचुनाव जमशेदपुर से लड़ा और भाजपा के प्रत्याशी व भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी को डेढ़ लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था। हालांकि, 2014 का चुनाव भी उन्होंने झाविमो प्रत्याशी के रूप में जमशेदपुर से ही लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी विद्युतवरण महतो से मात खा गए। 

    हार के बाद बन गए कांग्रेस के सिपाही

    2014 के चुनाव में हार के तुरंत बाद डॉ अजय ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। उन्हें कांग्रेस ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी सौंपी। बाद में झारखंड कांग्रेस की कमान सौंपी गई। लोकसभा चुनाव में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्होंने पूरा जोर लगाया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। हालांकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से सिंहभूम सीट झटककर कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया। लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद गुटबाजी खुलकर सामने आई और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, वे पार्टी में बने थे। आखिरकार आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद कयासों का दौर थम गया। यह राजनीति में डॉ अजय का तीसरा पड़ाव है।