जमशेदपुर, निर्मल प्रसाद। Fibre Reinforced Polymers पुल, ओवरब्रिज और अन्य ढांचागत निर्माण लोगों की जरूरत और विकास जुड़े हैैं, लेकिन इनके निर्माण में लगने वाला समय भी एक बड़ी समस्या रहा है। सुदूर इलाकों में पुल व पुलिया निर्माण में एक से डेढ़ साल तक का समय लग जाता है। साथ ही बालू, सीमेंट, गिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधनों का भी खूब दोहन होता है। इसे ध्यान में रखकर टाटा स्टील के रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग ने फाइबर रिइनफोस्र्ड पॉलीमर (एफआरपी) और ग्राफीन (जंगरोधी रसायन) की मदद से एक ऐसा उत्पाद तैयार किया है जो बेहद हल्का होने के साथ काफी टिकाऊ भी है।

कंपनी ने जमशेदपुर स्थित कंपनी परिसर और शावक नानावटी टेक्निकल इंस्टीट्यूट में इससे दो पैदल पुल तैयार किए हैैं। दोनों पुल तीन माह से भी कम अवधि में तैयार किए गए हैं। कंपनी इस नए उत्पाद का पेटेंट भी करा चुकी है। इस धातु से रेल की बोगियां, रासायनिक टैंक समेत धातु से बनने वाले तमाम उपकरण कम समय और कम लागत में बन जाएंगे। साथ ही इससे पुल, पुलिया और ओवरब्रिज का बनना निर्माण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा। टाटा स्टील (जमशेदपुर) के प्रवक्ता का कहना है कि औद्योगिक, इलेक्ट्रिक और कंप्यूटर क्रांति के बाद हम नए उत्पाद के क्षेत्र में चौथी क्रांति की शुरुआत कर रहे हैं। हम एफआरपी और ग्राफीन की मदद से उत्पादों को रिसाइकिल कर नए उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जो काफी टिकाऊ है और जल्द तैयार भी हो जाता है।

कई स्टील उत्पादों पर भी चढ़ाया जा रहा ग्राफीन का लेप

कंपनी प्रबंधन का दावा है कि यह स्टील की तरह मजबूत तो होगा ही, लेकिन बहुत हल्का भी होगा। इसे किसी भी आकार में बदला जा सकता है। यह स्टील की तुलना ज्यादा ऊष्मा अवशोषित करने में सक्षम भी होगा। टाटा स्टील ने ग्राफीन के उत्पाद का बाजार तैयार करने के लिए जमशेदपुर में छोटे पैमाने पर एक प्लांट स्थापित किया है। कंपनी अपने कुछ स्टील उत्पाद पर ग्राफीन का लेप लगा रही है जो उसके जीवनकाल को बढ़ाने में मदद करता है। टाटा स्टील में इस्तेमाल किए जाने वाले ग्राफीन मिश्रित प्लास्टिक और अन्य उत्पाद मौजूदा उत्पादों की तुलना में दोगुना चलते हैं। साथ ही ज्यादा दबाव झेलने में सक्षम भी हैं। 

कम समय के कारण लागत भी कम

ग्राफीन एक प्रकार का केमिकल है। इसे जंगरोधी माना जाता है। यह महंगा उत्पाद है। टाटा स्टील प्रबंधन का मानना है कि बालू, गिट्टी और सीमेंट से बनने वाले पुल व पुलिया की तुलना में एफआरपी से बने पुल-पुलिया का निर्माण जल्दी संभव है। इसमें मानव श्रम का इस्तेमाल कम होता है। इस कारण लागत में कमी आ जाती है। टाटा प्रबंधन ने फिलहाल प्रायोगिक तौर पर इसका निर्माण शुरू किया है। प्रबंधन का कहना है कि यह धातु भी कम कीमत में ही उपलब्ध होगी। लेकिन जब यह बाजार के लिए तैयार होगा तभी बताया जा सकता है कि परंपरागत पुल व एफआरपी पुल निर्माण की लागत पर सही-सही कितना अंतर आएगा। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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