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धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के लिए हाथी कॉरिडोर और वन्यजीव रिपोर्ट तैयार, केंद्र को जल्द भेजी जाएगी

Published: Tue, 04 Aug 2026 10:40 PM (IST)

जमशेदपुर वन प्रमंडल ने धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण संबंधी हाथी कॉरिडोर और वन्यजीव रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है।

एससीसीआइ के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी से विस्तृत चर्चा की।

एससीसीआइ के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी से विस्तृत चर्चा की।

HighLights

  1. धालभूमगढ़ एयरपोर्ट वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया में तेजी।

  2. हाथी कॉरिडोर, मानव-हाथी संघर्ष रिपोर्ट तैयार।

  3. SCCI ने मुख्यमंत्री से त्वरित निष्पादन का आग्रह किया।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सिंहभूम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना की वन भूमि हस्तांतरण स्वीकृति की दिशा में तेजी आई है। 
 
जमशेदपुर वन प्रमंडल कार्यालय ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा उठाए गए सभी लंबित प्रश्नों और बिंदुओं पर अपना विस्तृत जवाब तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया है।
 
इस संदर्भ में सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) सबा आलम अंसारी से मुलाकात कर परियोजना की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।
 

DFO स्तर से रिपोर्ट प्रेषित, परिवेश पोर्टल पर होगी अपलोड

मुलाकात के दौरान DFO सबा आलम अंसारी ने चैंबर प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनके कार्यालय स्तर पर लंबित सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार कर राज्य वन विभाग के उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से:

  •     प्रस्तावित एयरपोर्ट क्षेत्र में हाथी कॉरिडोर की स्थिति
  •     पिछले 5 वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष के आंकड़े
  •     वन्यजीव आवास और संबंधित विश्लेषण रिपोर्ट शामिल हैं।

 

अब राज्य वन विभाग के स्तर पर इन आंकड़ों का त्वरित परीक्षण कर केंद्र सरकार के 'परिवेश' (PARIVESH) पोर्टल पर अपलोड किया जाना बाकी है।
 

मुख्यमंत्री से त्वरित निष्पादन का आग्रह

चैंबर के अध्यक्ष मानव केडिया ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि SCCI ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य स्तर पर वन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सोनारी एयरोड्रम अपनी सीमित क्षमता के कारण आधुनिक वाणिज्यिक उड़ानों के लिए उपयुक्त नहीं है।

पूरे कोल्हान क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों के लिए धालभूमगढ़ हवाई पट्टी का जीर्णोद्धार आवश्यक है।

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