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धालभूमगढ़ एयरपोर्ट को जल्द मिलेगी फॉरेस्ट क्लीयरेंस, सालाना 52 हजार यात्री भरेंगे उड़ान

Published: Fri, 31 Jul 2026 07:00 AM (IST)

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर दोबारा सूचीबद्ध किया गया है। वन भूमि के नुकसान की ...और पढ़ें

केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत वर्ष 2019 में द्वितीय विश्व युद्ध काल की पुरानी हवाई पट्टी पर इस एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ था।

केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत वर्ष 2019 में द्वितीय विश्व युद्ध काल की पुरानी हवाई पट्टी पर इस एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ था।

HighLights

  1. परियोजना परिवेश पोर्टल पर पुनः सूचीबद्ध, फॉरेस्ट क्लीयरेंस की उम्मीद बढ़ी।

  2. वन भूमि नुकसान से 48 गुना अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा।

  3. एयरपोर्ट से सालाना 52 हजार यात्री, स्थानीय रोजगार को बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। कोल्हान क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना पर छाया अनिश्चितता का कुहासा अब पूरी तरह छंटने लगा है। 
 
केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर इस मेगा प्रोजेक्ट को दोबारा सूचीबद्ध (Relisted) कर लिया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा उठाई गई 19 आपत्तियों का तथ्यात्मक और समेकित जवाब एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) अगले कुछ ही दिनों में पोर्टल पर अपलोड करने जा रहा है।
 
नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वन क्षेत्र को होने वाले नुकसान की तुलना में इस प्रोजेक्ट से समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था को 48 गुना से अधिक का आर्थिक व सामाजिक लाभ होगा। 
 
इस ठोस आंकड़े के सामने आने के बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस (Forest Clearance) की अंतिम बाधा दूर होना लगभग तय माना जा रहा है।
 

29 करोड़ का नुकसान, 1438 करोड़ का लाभ

एएआई द्वारा तैयार विस्तृत कास्ट-बेनिफिट एनालिसिस (CBA) के आंकड़े बेहद सकारात्मक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 99.25 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण से पर्यावरण को लगभग ₹29.56 करोड़ (2,956.34 लाख रुपये) का नुकसान होगा। 
 
इसके विपरीत, अगले 50 वर्षों में इस परियोजना से समाज और सरकार को कुल ₹1,438.95 करोड़ का आर्थिक लाभ मिलेगा। इसका लागत-लाभ अनुपात (Benefit-Cost Ratio) 1:48.6 तय किया गया है।
 

सालाना 52 हजार यात्री करेंगे सफर

इस एयरपोर्ट के चालू होने से पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा।

  •     यात्री क्षमता: अनुमान है कि एयरपोर्ट शुरू होने पर प्रतिवर्ष 52,000 यात्री हवाई सफर करेंगे।
  •     राजस्व: अगले 50 वर्षों में यात्रियों से लगभग ₹1,300 करोड़ का विशाल राजस्व प्राप्त होगा। इसके अलावा एयरलाइंस फीस और अन्य शुल्कों से भी करोड़ों की अतिरिक्त आय होगी।


रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे:

  •     अस्थायी रोजगार: निर्माण कार्य के दौरान 250 मजदूरों को 300 दिनों का सीधा काम मिलेगा।
  •     स्थायी रोजगार: एयरपोर्ट के सुचारू संचालन के लिए 50 स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।
  •     अप्रत्यक्ष लाभ: लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।


7 साल से अटका था प्रोजेक्ट

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN) योजना के तहत वर्ष 2019 में द्वितीय विश्व युद्ध काल की पुरानी हवाई पट्टी पर इस एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ था। 
 
हालांकि, प्रस्तावित भूमि के हाथी कॉरिडोर और रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आने के कारण क्लीयरेंस अटक गया था। अब एएआई द्वारा इकोलॉजिकल प्रभाव और पेड़ों की कटाई जैसे सभी 19 बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब तैयार कर लिए जाने से निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ होता दिख रहा है।

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