एक जुलाई से पूरी तरह से प्लास्टिक बंद, इन लोगों ने कहा, ग्राहक लौटे तो लौटे, लेकिन नहीं करेंगे प्लास्टिक का इस्तेमाल
पॉलीथिन की थैलियां उड़कर जगह-जगह सड़कों पर और गलियों में फैल कर नगर की सुन्दरता को ख़राब करती हैं। यह नालियों में अटककर उनका बहाव रोक देती हैं और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।-पानी में मिलकर ये प्लास्टिक की थैलियाँ भूमिगत जल को भी ज़हरीला बना देती हैं।

जमशेदपुर, जासं। एक जुलाई आने में तीन दिन बाकी है। शुक्रवार से सिंगल यूज्ड प्लास्टिक बंद करने की घोषणा की गई है। लेकिन यह तो वक्त ही बताएगा कि इस नियम को धरातल पर उतारने में कितनी परेशानियां होगी। जब तक हम और आप जागरूक नहीं होंगे, यह अभियान सफल नहीं हो पाएगा। भले ही कोरोना का डर हो, हमने मास्क पहनने की आदत डाल ही ली। एक बाइक में दो लोग सफर कर रहे हैं तो दोनों हेलमेट भी पहन रहे हैं। भले ही प्रशासन का भय हो, लेकिन हम ऐसा कर रहे हैं। अगर हम प्लास्टिक से तौबा कर लें तो आने वाली पीढ़ियां हम सभी को याद करेगी।
प्लास्टिक को ना कहना कोई मुश्किल काम नहीं
गोविंदपुर रेलवे फाटक के पास ऐसे दो दुकानदार हैं, जो पिछले पांच साल से पालीथिन को तौबा कर लिया है। भले ही ग्राहक लौट जाए। ये हैं इलेक्ट्रिक दुकान के संचालक रमेश चंद्र पाल व मनिहारी दुकान के मालिक गुड्डू कुमार। वे कहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर उन्होंने यह काम किया। अब जो भी ग्राहक आते हैं, उन्हें यह पता होता है कि यहां पालीथिन नहीं मिलेगा। वह घर से झोला लेकर आते हैं। अगर हम आप भी इन दुकानदारों की तरह जागरूक हो जाएं तो प्लास्टिक मुक्त जमशेदपुर बनाने में सफल हो जाएंगे।
ग्राहक लौट जाए, पर ''नो पालीथिन
गोविंदपुर रेलवे फाटक के पास इलेक्ट्रिक दुकान के मालिक रमेश चंद्र पाल कहते हैं, अगर आज हम प्लास्टिक को ना नहीं कहते हैं तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेगी। इसके लिए तो सबसे पहले खुद से प्रयास करना होगा। अगर हम यह देखेंगे कि हर कोई तो पालीथिन का उपयोग करता है तो हम क्यों नहीं करे। ऐसी सोच गलत है। अगर आप पालीथिन या फिर सिंगल यूज्ड प्लास्टिक उपयोग नहीं कर रहे हैं तो आप भीड़ से अलग खड़े हैं। आपकी अलग पहचान है। समाज में एकाध इंसान ही आदर्श होता है। रमेश बताते हैं, पहली बार प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से अपील की थी प्लास्टिक का उपयोग ना करें। उनसे ही प्रेरित होकर हमने यह कदम उठाया। पॉलिथीन की थैलियों और डिस्पोजेबल प्लास्टिक उत्पादों को ना कहने की आदत डालें। दुकानदारों को ऐसे उत्पादों के साथ पॉलिथीन की थैली नहीं देनी चाहिए जो पहले से ही प्लास्टिक की पैकेजिंग में पैक हैं। जैसे ब्रेड और दूध। अगर सभी दुकानदार प्लास्टिक देना ही बंद कर दें तो ग्राहक खुद ही झोला लेकर घर से निकलने लगेंगे।
पालीथिन या सिंगल यूज्ड प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियां बंद हो : गुड्डू
गोविंदपुर स्थित मनिहारी दुकान के मालिक गुड्डू कुमार कहते हैं, सिर्फ नियम बनाने से काम नहीं चलेगा। सरकार को नियम को धरातल पर उतारने के पहले सख्त होना होगा। जो कंपनिया पालीथिन या सिंगल यूज्ड प्लास्टिक बनाती है, उस पर सबसे पहले कार्रवाई करनी चाहिए। अगर किसी समस्या को समूल खत्म करना है तो उसके जड़ को काटना जरूरी होता है। पिछले 15 साल से हम यही देख रहे हैं कि प्लास्टिक के खिलाफ कुछ दिन अभियान चलता है, फिर वही ढाक के तीन पात। पुन: मूषको भव के तर्ज पर फिर वापस वहीं आ जाते हैं। प्रशासन सख्त होगा, तभी यह संभव है। दुकानदारी के समय पालीथिन नहीं देने के कारण कई ग्राहक लौट भी जाते हैं। लेकिन हमें इसका कोई रंज नहीं। खुद में यह गर्व होता है कि दुनिया बचाने की इस मुहिम में हम भी सहभागी है।
सिंगल यूज प्लास्टिक : पालीथिन नहीं ठोंगा में देते सामान
जमशेदपुर। सिंगल यूज प्लास्टिक में सबसे पहला नाम पालीथिन कैरी बैग का आता है, जिसका दुकानदार बहुतायत में प्रयोग करते हैं। हालांकि शहर के कुछ दुकानदार ऐसे भी हैं, जो इसका उपयोग बिल्कुल नहीं करते। इन्हीं में से एक हैं मानगो चौक के दुकानदार भवानी शंकर, जो करीब तीन वर्ष से ग्राहकों को कागज के ठोंगा में ही किराना सामग्री देते हैं। वह बताते हैं कि प्लास्टिक का कैरी बैग सस्ता तो पड़ता है, लेकिन वह कचरे के रूप में बाजार में सालों तक बिखरा रहता है। कागज का ठोंगा जल्दी नष्ट हो जाता है। उनका कहना है कि पुलिस-प्रशासन यदि ग्राहकों पर ही 20 रुपये का जुर्माना लगा दे, तो बहुत जल्दी इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन सरकार दुकानदारों को ही परेशान करती है, ग्राहकों को दंडित नहीं करती।
एनएमएल की वैज्ञानिक गारबेज पेपर बैग को कर रहीं प्रोत्साहित
जमशेदपुर। सिंगल यूज प्लास्टिक पर केंद्र सरकार एक जुलाई से प्रतिबंध लगाने जा रही है, लेकिन राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. मीता तरफदार पांच वर्ष से गारबेज पेपर बैग को प्रोत्साहित कर रही हैं। इसके लिए वह अपने संपर्क के लोगों से रद्दी अखबार संग्रह करती हैं। इसे करीब एक दर्जन गरीब परिवार को देकर पेपर बैग बनाकर एक से ढाई रुपये तक बेचती हैं। लोग इसका उपयोग रसोईघर से निकलने वाली खाद्य सामग्री रखने में करते हैं। वह इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपील करती हैं कि सरसों तेल, रिफाइन, दूध, चायपत्ती के रैपर आदि को साफ अवस्था में संग्रह करें, ताकि इसका सही तरीके से री-साइकिल करने वाली एजेंसी को दिया जा सके।
सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है?
सिंगल यूज प्लास्टिक, जैसा कि नाम से ही साफ है कि ऐसे प्रोडक्ट जिनका एक बार इस्तेमाल करने के बाद इन्हें फेंक दिया जाता है। इसे आसानी से डिस्पोज नहीं किया जा सकता है। साथ ही इन्हें रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि प्रदूषण को बढ़ाने में सिंगल यूज प्लास्टिक की अहम भूमिका होती है।
सिंगल यूज प्लास्टिक कब बंद होगा?
सरकार एक जुलाई 2022 से इस तरह के प्लास्टिक के सामानों की बिक्री और इस्तेमाल को बंद कर रही है।
प्लास्टिक से बने चम्मच, गिलास से लेकर ईयरबड तक होंगे बंद
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक के झंडों से लेकर ईयरबड तक पर एक जुलाई से पाबंदी होगी। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इसके उत्पादन, भंडारण, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इसमें 30 जून से पहले इन पर पाबंदी की तैयारी पूरी करने को कहा गया है।
इन वस्तुओं पर रहेगी पाबंदी
सीपीसीबी के नोटिस के मुताबिक एक जुलाई से प्लास्टिक स्टिक वाले ईयरबड, गुब्बारे में लगने वाले प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट में काम आने वाले थर्माकोल आदि शामिल हैं। इसके साथ ही प्लास्टिक कप, प्लेट, गिलास, कांटा, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे जैसी कटलेरी आइटम, मिठाई के डिब्बों पर लगाई जाने वाली प्लास्टिक, प्लास्टिक के निमंत्रण पत्र, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले पीवीसी बैनर आदि शामिल हैं।
प्लास्टिक बैग के नुकसान
पॉलीथिन की थैलियां उड़कर जगह-जगह सड़कों पर और गलियों में फैल कर नगर की सुन्दरता को ख़राब करती हैं। यह नालियों में अटककर उनका बहाव रोक देती हैं और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।-पानी में मिलकर ये प्लास्टिक की थैलियाँ भूमिगत जल को भी ज़हरीला बना देती हैं। कभी-कभी जानवर प्लास्टिक की थैलियों समेत खाना निगल जाते हैं, जो उनके जीवन के लिए बहुत घातक हो सकता है। जहरीले रसायन प्लास्टिक के द्वारा हमारे भोजन में शामिल होकर हमारे रक्त और ऊतकों तक पहुँच जाते हैं और विभिन्न बीमारियों का कारण बनते हैं।
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