जमशेदपुर (जासं) । कोरोना वायरस के कारण स्कूल से लेकर ऑफिस तक बंद हैं और अधिकतर कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। वहीं, बच्चे भी ऑनलाइन क्लास से हाजिरी बनाने में जुटे हुए हैं। इस नई संस्कृति ने लैपटॉप बाजार में अचानक बूम आ गई है। कोरोना वायरस के कारण अधिकतर कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दे रही है। ऐसे में मोबाइल से आठ घंटे की ड्यूटी संभव नहीं है और वे लैपटॉप खरीद रहे हैं। अचानक से आई इस नई क्रांति ने इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अचानक से नई डिमांड आ गई है। लेकिन गलवन घाटी की घटना के बाद से उपभोक्ता चीनी कंपनियों के लैपटॉप खरीदने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं और भारतीय उत्पाद ज्यादा खरीद रहे हैं। ऐसे में जिन इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों के पास चीनी कंपनियों का पुराना स्टॉक हैं वह केवल शोरूम की शोभा बढ़ा रहा है। 

नहीं है स्टॉक, माल खपत

कई इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में कम कीमत वाले लेनेवो और एचपी कंपनी के लैपटॉप नहीं मिल रहे हैं और ग्राहक 30 से 35 हजार रुपये कीमत वाले दूसरी कंपनियों के लैपटॉप खरीदना नहीं चाहते हैं। ऐसे में कंपनी मालिक चाह कर भी कम कीमत वाले सामान मंगवाने पर भी कंपनियां माल नहीं भेज पा रही हैं। क्योंकि कोरोना के कारण कंपनियों में भी 30 प्रतिशत मैनपावर पर काम चल रहा है और कई कंपनियों में उत्पादन भी 50 प्रतिशत तक हो गया है। ऐसे में माल नहीं मिल रहा है।

 

क्या कहते हैं विक्रेता

बाजार में लैपटॉप की डिमांड बढ़ गई है। कोई भी ग्राहक चीनी उत्पाद खरीदना नहीं चाहता। उनकी डिमांड सीधे भारतीय उत्पादों की है लेकिन बाजार में भारतीय कंपनियों के सस्ते लैपटाॅप नहीं मिल रहे हैं। -राजा सिंह, संचालक, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स

बाजार में कम कीमत वाले लैपटॉप खत्म हो गए हैं और कंपनियों से आर्डर करने के बावजूद माल नहीं आ रहा है। ऐसे में बाजार से लैपटॉप लगभग आउट ऑफ स्टॉक हो गया है।  - बंटी गर्ग, संचालक, सरगम इलेक्ट्रॉनिक्स 

इन कंपनियों के लैपटॉप की डिमांड बढ़ी

 एचपी, लेनेवो, एसर, डेल, आसुस

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