जमशेदपुर, जासं। अपने पिता पंडित अच्छन महाराज, चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज से कथक की तालीम लेने वाले पंडित बृजमोहन मिश्र उर्फ बिरजू महाराज तीन बार जमशेदपुर आए थे। इस दौरान यहां वे दो बार अपनी टीम के साथ कथक का प्रदर्शन करने आए थे, जबकि एक बार शहर में तीन दिवसीय नृत्य कार्यशाला की थी। इसमें जमशेदपुर के दर्जनों कलाकारों ने उनसे प्रशिक्षण लिया था।

कथक नर्तक संदीप बोस बताते हैं कि महाराज जी शहर में पहली बार 1985 में आए थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली और बनारस से आई अपनी टीम के साथ साकची स्थित रवींद्र भवन में प्रदर्शन किया था। कथक नृत्यांगना नवमीता चौधरी बताती हैं कि इसके बाद बिरजू महाराज अपनी शिष्या शाश्वती सेन के साथ 11 अगस्त 2005 को जमशेदपुर आए थे, जिसमें उन्होंने रूसी मोदी सेंटर फॉर एक्सीलेंस में तीन दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया था। उस वक्त मैं भी प्रशिक्षु के रूप में शामिल हुई थी। चौथे दिन महाराज जी ने मुझे शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया था, क्योंकि मुझे प्रयाग संगीत सम्मेलन से कथक में स्वर्णपदक मिला था।

टाटा आडिटोरियम में किया नृत्य प्रदर्शन

चौथे दिन बिरजू महाराज ने एक्सएलआरआइ स्थित टाटा आडिटोरियम में नृत्य का प्रदर्शन किया था। उनके अलावा शाश्वती सेन समेत जमशेदपुर से कई प्रशिक्षुओं ने नृत्य किया, जो तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल थे। संदीप बोस बताते हैं कि अंतिम बार बिरजू महाराज 2009 में जमशेदपुर आए थे, जहां उन्होंने अपनी टीम के साथ एक्सएलआरआइ स्थित टाटा आडिटोरियम में नृत्य का प्रदर्शन किया था। शहर में बिरजू महाराज की शिष्या गौरी दिवाकर भी हैं, जो आज खुद दिल्ली समेत देश के विभिन्न शहरों में कथक नृत्य कार्यशाला का आयोजन करती हैं। नवमीता चौधरी बताती हैं कि जमशेदपुर में ही बिरजू महाराज ने मुझे दिल्ली आने को कहा था। मैंने वहां कमानी सेंटर में आयोजित साधना कार्यक्रम में नृत्य किया था। उनकी पुरानी शिष्या में भालूबासा निवासी गीता तिवारी भी हैं, जो भालूबासा कम्युनिटी सेंटर में कई वर्षों तक कथक का प्रशिक्षण दे रही थीं।

रंजीत सिंह गबरी ने कोलकाता में देखा था नृत्य

शहर के शास्त्रीय संगीतज्ञ रंजीत सिंह गबरी ने बताया कि मैंने 2003 में कोलकाता में पं. बिरजू महाराज का नृत्य देखा था। दरअसल मैं अपने उस्ताद विलायत खां के साथ वहां एक कार्यक्रम में गया था, जहां पहला कार्यक्रम बिरजू महाराज का था। मैंने विलायत अली खां साहब के साथ उनका नृत्य देखा था। उनकी चपलता व भाव-भंगिमा के सभी कायल थे। उसके बाद महाराज जी जब-जब जमशेदपुर आए, मैं उनके कार्यक्रम में शामिल रहा।

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कथक सम्राट पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज जी का निधन राष्ट्रीय क्षति है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन कला व नृत्य जगत के लिए ही नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति और देश के लिए भी समर्पित कर दिया था। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें व शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दे। ॐ शांति। - Dr. Sanjay Jaiswal (@Dr.SanjayJaiswal) 17 Jan 2022

Edited By: Rakesh Ranjan