जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : हाल ही में ढाका में आयोजित एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप में पूर्व विश्व चैंपियन दीपिका को मात देकर तहलका मचाने वाली अंकिता भकत तीरंदाजी की रानी बनकर उभर रही है।

पिछले साल रोसेरियो (अर्जेटीना) में आयोजित विश्व चैंपियनशिप की मिश्रित स्पद्र्धा में स्वर्ण जीतने वाली टाटा तीरंदाजी अकादमी की इस प्रशिक्षु के पास कभी खुद का तीर-धनुष नहीं हुआ करता था। कोलकाता के चिड़िया मोड़ स्थित छोटे से घर में आज भी पूरा परिवार रहता है। भारत की पहली वामहस्त तीरंदाज अंकिता भकत आज भी वह दिन याद करती है, जब वह उधार के तीर-धनुष से अभ्यास करती थी। औसतन एक तीर-धनुष की कीमत तीन लाख रुपये होती है। अंकिता के पिता शांतनु भकत दूध बेचते हैं। अंकिता को बचपन में ही तीरंदाजी से प्यार हो गया। शुरुआत में कोलकाता तीरंदाजी क्लब में प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2014 में टाटा तीरंदाजी अकादमी में चयन होने के बाद उसकी जिंदगी ही बदल गई। अंतरराष्ट्रीय कोच पूर्णिमा महतो, धर्मेद्र तिवारी व राम अवधेश की सानिध्य ने अंकिता की प्रतिभा को निखार मिली। इसी वर्ष एशिया कप स्टेज-2 की महिला रिकर्व वर्ग में अंकिता ने प्रोमिला दायमरी व साक्षी राजेंद्र के साथ मिलकर रजत पदक अपने नाम किया। फाइनल में टीम को चीनी ताइपेई से हार का सामना करना पड़ा।

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