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वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवे को मिलेगी रफ्तार! 141 किमी सड़क के लिए वन स्वीकृति मिली

Published: Fri, 16 Oct 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड हाईवे के 141 किमी निर्माण को गति दे रहा है। वन भूमि संबंधी ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. झारखंड में 141 किमी लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण जारी।

  2. हाईवे परियोजना को चार पैकेजों में बांटा गया है।

  3. चारों वन प्रमंडलों में स्टेज-1 वन स्वीकृति मिल चुकी है।

संवाद सूत्र, हजारीबाग। वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के निर्माण को गति देने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) प्रयासरत है। हजारीबाग परियोजना कार्यान्वयन इकाई (पीआईयू) के अंतर्गत लगभग 141 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है।

भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा यह हाईवे झारखंड समेत पूर्वी भारत में सड़क संपर्क मजबूत करने, यात्रा समय कम करने और माल परिवहन को सुगम बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

एनएचएआई हजारीबाग के परियोजना निदेशक आशुतोष सोनी के अनुसार, पीआइयू हजारीबाग के अंतर्गत परियोजना को चार पैकेजों में बांटा गया है। पैकेज-8 की लंबाई 37.3 किलोमीटर, पैकेज-9 की 31 किलोमीटर, पैकेज-10 की 35.6 किलोमीटर और पैकेज-11 की 36.9 किलोमीटर है। चारों पैकेजों की कुल लंबाई 140.8 किलोमीटर है, जिसे लगभग 141 किलोमीटर बताया गया है।

ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण में वन भूमि से संबंधित वैधानिक स्वीकृतियां महत्वपूर्ण हैं। परियोजना के दायरे में चतरा नॉर्थ, चतरा साउथ, हजारीबाग वेस्ट और रामगढ़ वन प्रमंडल शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आवश्यक स्वीकृतियों और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

परियोजना निदेशक के अनुसार, चतरा नॉर्थ और चतरा साउथ वन प्रमंडलों में वर्किंग परमिशन मिल चुकी है। वहीं, चारों वन प्रमंडलों में स्टेज-1 वन स्वीकृति प्राप्त हो गई है। अब वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी शेष औपचारिकताओं और पेड़ों की कटाई की अनुमति के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

परियोजना के लिए वन भूमि से संबंधित प्रतिपूरक देयताओं के भुगतान में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चारों वन प्रमंडलों में प्रतिपूरक वानिकी, शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) और अन्य वन संबंधी मदों में कुल लगभग 305.30 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं।

इसमें चतरा नॉर्थ वन प्रमंडल में 58.95 करोड़ रुपये, चतरा साउथ में 121.03 करोड़ रुपये, हजारीबाग वेस्ट में 58.99 करोड़ रुपये और रामगढ़ वन प्रमंडल में 66.32 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक राशि चतरा साउथ वन प्रमंडल में जमा हुई है

एनएचएआई के परियोजना निदेशक आशुतोष सोनी ने बताया कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वन विभाग और संबंधित प्रशासनिक प्राधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। वन भूमि से जुड़ी शेष औपचारिकताओं को नियमानुसार पूरा करने और आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने की दिशा में कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने के साथ परियोजना के निर्माण कार्य को और गति मिलने की संभावना है। 

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