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    सावधान! कहीं आपके बच्चे भी न हो जाएं इस नशे का शिकार, हजारीबाग में तेजी से फल-फूल रहा कफ सिरप के नशे का बिजनेस

    By Vikash SinghEdited By: Mohit Tripathi
    Updated: Thu, 15 Jun 2023 12:00 AM (IST)

    हजारीबाग में खांसी के लिए सरकार द्वारा अधिकृत कफ सीरप का इस्तेमाल दवा के रूप में कम युवा नशा के लिए अधिक कर रहे है। यही कारण है कि क्षेत्र में आपराधिक घटनाएं बढ़ी है। अधिकांश वारदातों में पकड़े जाने वाले अपराधी नशे में धुत्त पाए जाते हैं।

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    स्कूली बच्चे व युवा बन रहे हैं नशीली पदार्थों का शिकार।

    रुस्तम खान, हजारीबाग: हजारीबाग में खांसी के लिए सरकार द्वारा अधिकृत कफ सीरप का इस्तेमाल दवा के रूप में कम युवा नशा के लिए अधिक कर रहे है। यही कारण है कि क्षेत्र में आपराधिक घटनाएं बढ़ी है। अधिकांश वारदातों में पकड़े जाने वाले अपराधी नशे में धुत्त पाए जाते हैं, जिसका दर्जनों उदाहरण पेलावल ओपी में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले हैं।

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    नशे की जद में आए युवा आदतन अपराधी बन रहे हैं और गंभीर आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ये घटनाएं पुलिस के लिए भी चिंता का सबब बन रहे हैं। नशे का केंद्र शहर के आसपास बसे रोमी, पेलावल, आजादनगर और सुलताना है।

    स्कुली बच्चों को निशाना बना रहे धंधेबाज

    धंधेबाज स्कूली बच्चों को टारगेट मे लेकर अपने धंधे को पुष्पित-पल्लवित करने मे लगे हैं। हालात यह हो गई है कि स्कूलों व कॉलेजों के विद्यार्थी भी नशे के शिकार बनते जा रहे हैं। नशे के लत लग जाने के बाद 50-55 रूपए का कफ सीरप धंधेबाजों के ब्लैक मार्केट से दो से तीन सौ रूपए में खरीदने के लिए छोटे-मोटे अपराध तक कर डालने में कोई हिचक नही रखते हैं।

    ऑन डिमांड सप्लाई की जाती है कफ सीरप की बोतलें

    सरकार द्वारा कफ सीरप की खुली बिक्री पर प्रतिबंध के बाद से भले ही दवा दुकानों से विभिन्न कंपनियों की कफ सीरप की बोतलें गायब हो गई हों। मगर नशे के धंधेबाजों और नशेड़ियों के लिए यह आज भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। अब कफ सीरप दवा दुकानों में कम और धंधेबाजों के अड्डे पर ज्यादा उपलब्ध है।

    कोड में ही बात करते हैं धंधेबाज

    नशीली पदार्थों के तस्करों को बस मोबाइल पर सम्पर्क कर कोड मे बात करना होता है। सिरफ रोमी, पेलावल व आजादनगर व गदोखर रोड एक अनुमान के मुताबिक हर महीने लाखों का कफ सीरप का कारोबार किया जा रहा है।

    काले धंधे के कारोबारियों के गिरेबान तक नहीं पहुंच पाती पुलिस

    इसकी भली भांति जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी होती है। मगर उनके हाथ नशे के इन बड़े काले कारोबारियों के गिरेबान तक नही पहुंच पाती। इसका चाहे जो भी कारण रहा हो। करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन एसडीएम आदित्य रंजन द्वारा कफ सिरप की बिक्री करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध एक सघन अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की गई थी।

    उन्मुलन अभियान अभियान पर भारी हैं तस्कर

    इन दिनो पेलावल, रोमी, आजादनगर व गदोखर रोड में अफीम और ब्राउन सुगर, कफ सिरप आदि नशीले पदार्थों का खुलेआम तस्करी और सेवन से आम जनजीवन प्रभावित हो रही है। जनप्रतिनिधियों द्वारा चलाए जा रहे नशा उन्मूलन अभियान और अखबारों में छपे खबर को लेकर कई पत्रकार व जनप्रतिनिधि धंधेबाजो व काले कारोबारियों के निशाने पर हैं।

    पूर्व जिप प्रतिनिधि पर चल चुकी है गोली

    लगातार नशा उन्मूलन मुहिम चलाए जाने को लेकर पूर्व जिप प्रतिनिधि मिस्बाहुल इस्लाम पर पिस्टल से गोली भी चलाई गई, जिसमें वे बाल बाल बचे। नशेबाज को पुलिस ने हिरासत में लेकर न्यायिक हिरासत मे भेजा। पूछताछ में पता चला कि नशीली पदार्थों के कारोबारियों ने ही गोली मारने की सुपारी दी थी। नशा पर खबर लिखने को लेकर आजादनगर के एक पत्रकार पुत्र को भी उसके निर्माणाधीन मकान में थैले में कफ सीरप रखकर फंसाया गया।