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होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई से सामाजिक संघर्ष तक का सफर, आदिवासी अस्मिता की आवाज थीं निशा भगत

Published: Sat, 07 Nov 2026 08:32 AM (IST)

युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत के असामयिक निधन से गुमला में शोक की लहर है। उन्होंने आदिवासी अस्मिता, सरना ...और पढ़ें

युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत।

युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत।

HighLights

  1. युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत का असामयिक निधन।

  2. सितंबर 2025 में बनीं केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष।

  3. 2024 में जेएलकेएम के टिकट पर गुमला विधानसभा से लड़ा था चुनाव।

जागरण संवाददाता, गुमला। आदिवासी अस्मिता, सरना संस्कृति और सामाजिक अधिकारों की आवाज बुलंद करने वाली युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत के असामयिक निधन से गुमला में शोक की लहर है।

रांची के पिठौरिया में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की सूचना से जिले के लोग स्तब्ध हैं। सरना और सनातन परंपराओं को एक सूत्र में जोड़ने की बात रखने वाली तथा धर्मांतरण के विरोध में सक्रिय रहने वाली निशा ने कम उम्र में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

गुमला शहर के बड़ाईक मोहल्ला, डीएसपी रोड निवासी निशा के पिता हांदू भगत झारखंड के विभिन्न आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। पिता के आंदोलनकारी विचारों और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष का निशा के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने दुर्गापुर के डीएसएमएस संस्थान से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद बेंगलुरु में नौकरी शुरू की, लेकिन कुछ समय बाद नौकरी छोड़कर गुमला लौट आईं। यहां उन्होंने सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। आदिवासी संस्कृति, परंपरा, सरना धर्म, सरना झंडे की पहचान और जल, जंगल, जमीन पर अधिकार उनके प्रमुख मुद्दे थे। आदिवासी समाज में सामाजिक कुरीतियों और मतांतरण से जुड़े सवालों पर भी वह लगातार अपनी आवाज उठाती रही थीं। उनका प्रयास आदिवासी महिलाओं और युवतियों को सामाजिक संगठनों से जोड़ना था।

सितंबर 2025 में उन्हें केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद संगठन के माध्यम से महिलाओं को जागरूक और संगठित करने की पहल की। सामाजिक गतिविधियों के साथ उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में गुमला विधानसभा सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर चुनाव लड़ा। दिसंबर 2025 में मतांतरण के विरोध में मुंडन कराकर भी वह चर्चा में आई थीं। उनके निधन से जिले के सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्र में शोक है। 

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