Gumla chunav Result: गुमला की सियासी जंग में झामुमो को मिली जीत, बीजेपी के सुदर्शन भगत हारे
गुमला में 2005 में पहली बार चुनाव कराए गए। इस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के भूषन टिर्की ने जीत हासिल की। 2009 के चुनाव में यहां से भाजपा ने कब्जा जमाया। 2019 में भाजपा के शिवशंकर ओरोन यहां से विधायक बने। 2019 के चुनाव में यहां से झामुमो के भूषण टिर्की विजयी रहे और अब एक बार फिर वो गुमला से विधायक चुने गए हैं।

डिजिटल डेस्क,गुमला। झारखंड का जिला होने के साथ ही गुमला महत्वपूर्ण विधानसभा सीट भी है। गुमला विधानसभा सीट (Gumla vidhan sabha chunav Result) में इस बार बीजेपी और झामुमो उम्मीदवार के बीच कांटें की टक्कर देखने को मिली। इस बार गुमला से बीजेपी के सुदर्शन भगत और झामुमो के भूषण तिर्की चुनावी मैदान में थे, जिसमें झामुमो के भूषण 26301 वोट से चुनाव जीत गए।
लोहरदगा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आने वाली इस सीट पर 2005 में पहली बार चुनाव कराए गए। इस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के भूषन टिर्की ने जीत हासिल की। 2009 के चुनाव में यहां से भाजपा ने कब्जा जमाया और बीजेपी प्रत्याशी कमलेश ओरोन को जनता ने विधायक चुना। 2019 में भाजपा के शिवशंकर ओरोन यहां से विधायक बने। 2019 के चुनाव में यहां से झामुमो के भूषण टिर्की विजयी रहे। झामुमो ने फिर से भूषण टिर्की को मौका दिया है और उन्होंने जीत दर्ज की।
झामुमो प्रत्याशी ने पहले राउंड से बनाई बढ़त
गुमला में 9 बजे पहले राउंड की गिनती जारी की गई, जिसमें गुमला विधानसभा के झामुमो प्रत्याशी भूषण तिर्की को 4880, भाजपा प्रत्याशी सुदर्शन भगत को 2195 वोट मिले, जिसमें भूषण तिर्की 2685 मतों से आगे रहे। जैसे-जैसे मतों की गिनती होती गई झामुमो प्रत्याशी की झोली भारी होती गई, जबकि भाजपा प्रत्याशी की झोली में हर बार कम मत प्राप्त हो रहे थे। हर राउंड में यही स्थिति देखी जा रही थी।
प्रारंभ से आठ-दस राउंड तक तो गुमला विधानसभा के भाजपा समर्थक अपने आपको को संभाले रखे ,उन्हें उम्मीद थी कि रायडीह और गुमला प्रखंड का इवीएम खुलने के बाद स्थिति में सुधार होगा और मतों का अंतर कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। गुमला और रायडीह प्रखंड से झामुमो को भारी मत मिलना उनके लिए हैरत में डालने वाला रहा। आखिरी राउंड की काउंटिंग तक वोटों का अंतर और बढ़ गया और झामुमो के भूषण 26301 वोट से चुनाव जीत गए।
गुमला विधानसभा सीट का इतिहास
18 मई 1983 को रांची से अलग होकर गुमला जिले का गठन किया गया। प्रकृति की सुंदरता में डूबा यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और नदियों से घिरा होने के कारण पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शुमार है। यहां हर मंगलवार विशाल पशु मेले का आयोजन होता है। इस इलाके में बॉक्साइट और लेटेराइट एल्युमिनियम अयस्क निकालने के लिए बड़ी संख्या में खनन कारखाने स्थापित हैं।
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