संवाद सूत्र,गुमला : गुमला जिला हाकी का नर्सरी रहा है। जब यहां के युवक युवतियां टांड और साधारण खेल मैदान में हाकी अभ्यास कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुमला को पहचान दिलायी तब तत्कालीन राज्य सरकार ने वर्ष 2006-07 में हाकी के विकास के लिए गुमला के संत इग्नासियुस हाई स्कूल में एस्ट्रोटर्फ की स्वीकृति दी। लाखों रुपये की लागत से मैदान में ट्रफ तो लगे लेकिन उसका लाभ गुमला के हाकी खिलाड़ियों को नहीं मिला। इसका कारण टर्फ मानक मापदंड के अनुकूल नहीं लगा। मानक मापदंड के अनुरूप स्ट्रोटर्फ स्टेडियम नहीं बना जिस कारण संत इग्नासियुस हाई स्कूल के तत्कालीन प्राचार्य ने एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम को हैंडऑवर लेने से इंकार कर दिया। जानकारी के अनुसार अभी तक एस्ट्रोटर्फ स्कूल को हैंडओवर नहीं हुआ। 26 जुलाई 2021 को खेल निदेशालय के निर्देशन पर झारखंड खेल प्राधिकरण से आए दो सदस्यीय टीम ने स्टेडियम का निरीक्षण किया और टर्फ को कंडम घोषित कर दिया। निरीक्षण दल में आए खेल परामर्शी देवेन्द्र कुमार सिंह और कनीय अभियंता सच्चिदानंद कुमार ने एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम का बारिकी से निरीक्षण किया। प्राचार्य फादर मनोहर खोया ने बताया कि अब तक स्टेडियम विद्यालय को हैंडओवर नहीं किया गया है। वर्ष 2010 में एक दिन के लिए स्प्रिंकर लगा था। टर्फ अनुकूल नहीं होने के कारण हैंडओवर नहीं लिए। निरीक्षण दल के सदस्यों ने कहा कि टर्फ अब खेलने लायक नहीं है। उन्होंने खामियों में सुधार के लिए प्वायंटआउट भी किए। कोट

खेल निदेशक के निर्देशन पर राज्य भर में खेल सेंटर का निरीक्षण किया जा रहा है। सेंटर और स्टेडियम का निरीक्षण कर रहे हैं। कोच से मिलकर कमियां को दूर करने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। एस्ट्रोटर्फ अब खेलने लायक नहीं है। इसका भी रिपोर्ट उच्चाधिकारी को देंगे।

देवेन्द्र कुमार सिंह

खेल परामर्शी

झारखंड राज्य खेल प्राधिकारण,रांची कोट

राज्य निदेशालय से टीम आयी है। गुमला के सभी खेल स्टेडियम सेंटर आदि का भ्रमण कर रहे हैं। जो कमी है उसे बताया जा रहा है। खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए जो भी आवश्यकताएं पड़ेगी उसका प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा जाएगा।

हेलमता बून

जिला खेल पदाधिकारी गुमला

Edited By: Jagran