गोड्डा: अपने विभिन्न मांगों को ले कुड़मी समाज ने शुक्रवार को अखिल भारतीय आदिवासी कुड़मी महासभा - ऑल इंडिया कुड़मी ट्राइबल्स एसोशिएसन (एकता) के बैनर तले शहीद स्तंभ परिसर में धरना प्रदर्शन किया। धरना - प्रदर्शन कार्यक्रम की अगुवाई एकता के संस्थापक संजीव कुमार महतो ने की। अपने संबोधन में संजीव ने बताया कि कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति के सूची में सूचीबद्ध करने, कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने, सरना धर्म कोड जारी करने, कस्टमरी लॉ बोर्ड का गठन, सीएनटी व एसपीटी एक्ट को पूर्वरत रखने, शहीद रघुनाथ महतो, शहीद चानकु महतो , शहीद तिलका मांझी, विनोद बिहारी महतो, शहीद निर्मल महतो के स्मारक बनाने के साथ-साथ कारगिल शहीद विरेंद्र महतो चौक गोड्डा में उनकी मूर्ति लगाने समेत नौ सूत्री मांगों को ले यह धरना प्रदर्शन है। कहा कि जब तक हमारी इन मांगों को केंद्र व राज्य सरकार नहीं मानती है हमारा आंदोलन जारी रहेगा। महतो ने कहा कि केंद्र सरकार के दस्तावेज पिपल्स ऑफ इंडिया में कुड़मी और कुरमी बिल्कुल अलग अलग चेप्टर में दो अलग रुप में सरकार द्वारा अंकित किया गया है। कुड़मी को राज्यमंत्री सरकार अपने सूची में कुर्मी (महतो) बीसी वन वर्ग में रखी थी। जिसे राज्य सरकार के काíमक विभाग ने छह जनवरी 2012 द्वारा सुधार कर कुड़मी - कुर्मी (महतो) किया। कुड़मी की स्वीकृति दिया व कुड़मी जनजाति को मौका दिया। अपने स्वेच्छा से कुर्मी (महतो) या कुड़मी (महतो) का प्रमाण पत्र प्राप्त करें। पूर्व में भी ब्रिटिश काल से हमेशा कुड़मी को कुर्मी से अलग रखकर कुड़मी के जनजातीय परिचय को बचाने का प्रयास तंत्र व बुद्धिजीवी ने किया। लेकिन हाल के वर्षों में कई गड़बड़ियां हुई है। सरकार इसे दुरुस्त करें। मौके पर जय प्रकाश महतो, श्यामलाल महतो, दीपक महतो, फाल्गुनी महतो, सुमेंदर महतो, श्रवण महतो, राजेंद्र महतो, गो¨वद महतो, तारा चंद महतो,यशोदा महतो, शांति महतो, मनोज महतो, देवेन्द्र महतो , हरि महतो, उमेश महतो, विशाखा महतो, शशिकला महतो आदि थे।

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