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निशिकांत दुबे का चौका रोकने को महागठबंधन ने सजाई फिल्डिंग, स्टार प्रचारकों को दिया बड़ा टास्क

लोकसभा चुनाव के लिए आखिरी चरण की वोटिंग एक जून को होगी। गोड्डा सीट पर अंतिम चरण में मतदान होना है। इस सीट को भाजपा नेता निशिकांत दुबे का गढ़ माना जाता है। वह लगातार तीन बार से इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। वहीं निशिंकात का चौका रोकने को इस बार महागठबंधन अपनी तैयारी कर रही है। इसे लेकर पूरी ताकतें झोंकने में जुटी है।

By Ravi Kant Singh Edited By: Shashank Shekhar Published: Tue, 28 May 2024 07:51 PM (IST)Updated: Tue, 28 May 2024 07:51 PM (IST)
निशिकांत दुबे का चौका रोकने को महागठबंधन ने सजाई फिल्डिंग (फोटो सोर्स- एएनआई)

संवाद सहयोगी, पोड़ैयाहाट (गोड्डा)। लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में झारखंड की सबसे हाई प्रोफाइल सीट गोड्डा लोकसभा बन गई है। यहां से भाजपा के प्रत्याशी निशिकांत दुबे चौका मारने को लेकर जी जान से जुटे हुए हैं वहीं, इन्हें रोकने के लिए विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी प्रदीप यादव ने फील्डिंग सजाई है।

देखना दिलचस्प होगा कि चार जून को फैसला किसके पक्ष में जाता है। विकास के रथ पर सवार निशिकांत को रोकने के लिए विपक्षी गठबंधन में शामिल कांग्रेस, झामुमो, राजद और वामपंथी मोर्चा की गोलबंदी कितनी कारगर होगी, यह बड़ा सवाल है। एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए दोनों ओर से जबरदस्त प्रहार चल रहा है।

2009 से निशिकांत दुबे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे प्रदीप यादव

प्रदीप यादव लगातार 2009 से निशिकांत के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक सफलता नहीं मिली है। निशिकांत दुबे अपने विकास कामों को लेकर जनता के बीच लोकप्रिय हैं। गोड्डा में रेल लाइन, गोड्डा स्टेशन से खुलने वाली ट्रेनों की संख्या, एम्स, फोरलेन सड़क, एयरपोर्ट आदि बड़े-बड़े कार्यों को लेकर वे विकास के मुद्दे पर जनता से वोट मांग रहे हैं।

वहीं, विपक्षी गठबंधन स्थानीयता, संविधान, ओबीसी आरक्षण, बेरोजगारी , महंगाई आदि मुद्दों पर भाजपा को घेरने में लगा हुआ है। आम मतदाताओं की कसौटी पर कौन खरा उतरेगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। हालांकि, लोगों का मानना है कि लगातार तीन बार से सांसद रहे निशिकांत दुबे के साथ एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर आड़े आ सकता है।

मतदाताओं की चुप्पी ने बढ़ाई परेशानी 

यहां आइएनडीआइए के पक्ष में यादव, मुस्लिम व आदिवासियों की एकजुटता की बात कही जा रही है, जबकि भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में ब्राह्मण (सवर्ण), वैश्य, पचकोनिया जाति की एकजुटता की बात कही जा रही है।

दोनों ही पक्ष एक दूसरे के वोट बैंक पर सेंधमारी कर अपनी स्थिति मजबूत बनाना चाहता है। इस बीच मतदाताओं की चुप्पी ने दोनों की परेशानी बढ़ा दी है। आशीर्वाद देने में किसी भी दल को यहां मतदाता कोई कंजूसी नहीं कर रहा है। अंतिम क्षण में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह बड़ा सवाल है।

स्टार प्रचारकों ने लगाया जोर

महागठबंधन की और से गोड्डा में प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन की सभा हो चुकी है। वहीं, देवघर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राजद नेता तेजस्वी यादव आदि जनसभा कर चुके हैं। भाजपा की ओर से यहां मधुपुर में अमित शाह, पोड़ेयाहाट में प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और मंगलवार को निरहुआ और आम्रपाली का रोड शो हुआ है।

निशिकांत की जीत का अंतर लगातार बढ़ता गया

निवर्तमान सांसद निशिकांत दुबे की जीत का अंतर प्रत्येक चुनावों में बढ़ता गया है। 2009 में उनके सामने फुरकान अंसारी थे। इसमें छह हजार से जीत मिली थी। 2014 के चुनाव में भी उनके सामने फुरकान अंसारी की प्रतिद्वंद्वी थे, 60 हजार से अधिक अंतर से निशिकांत को जीत मिली थी। वहीं, 2019 में जेवीएम से प्रदीप यादव को उन्होंने एक लाख 80 हजार वोट से हराया था।

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